एक सचिव स्तर के आईएएस अधिकारी हैं। बीएससी व एमएससी कृषि से करने के बाद उन्होंने पीएचडी भी की है। लिहाजा वह नाम के साथ डॉक्टर भी लिखते हैं। साहब की तैनाती की।
खबर मिली तो विभाग के लोगों ने अतिउत्साह दिखाते हुए उनकी नेमप्लेट भी लगवा दी। नाम भी पूरा लिखवाया। पर, साहब कार्यभार संभालने पहुंचे तो नेमप्लेट देखते ही तेवर बदल गए।
स्टाफ को हिदायत हुई कि नाम से डॉक्टर हटवा दिया जाए। स्टाफ ने वैसे तो उनकी नेमप्लेट ग्रेडेशन लिस्ट देखकर बनवाई थी।
फिर भी विश्वास नहीं हुआ। नई ग्रेडेशन लिस्ट मंगवाकर देखी गई, उसमें भी नाम के साथ डॉक्टर जुड़ा हुआ था।
खैर आनन-फानन में साहब के नेमप्लेट से डॉक्टर शब्द हटा दिया गया। पर विभाग के लोग हैरान हैं कि आखिर साहब डॉक्टर लिखने का अधिकार होने के बावजूद क्यों नहीं लिखना चाहते।
यदि लिख ही गया था तो मिटवाने की क्या जरूरत थी? - दर्शक