सूबे के अपने वजीर को एक बार फिर जोर का झटका धीरे से लगा है। इस बार झटका रॉयल पैलेस से लगा है।
दरअसल, वजीर की अपनी जिद होती है। वे जिद पर ही काम करते हैं। उन्होंने सबसे पहले अपने विभाग की एक संवैधानिक संस्था में अध्यक्ष पद पर अपने एक ‘खास’ की नियुक्ति कराई।
जिस संवैधानिक संस्था पर खास को बैठाया, उन्हें वजीर की तरह ही रुतबा दिलाने का भी फैसला कर लिया। वजीर-ए-आला भी अपने इस वजीर की बात मानते हैं।
लिहाजा उन्होंने भी वजीर के निर्णय पर अपनी मुहर लगा दी, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यही निर्णय किरकिरी करा सकता है।
रॉयल पैलेस ने इस निर्णय पर अपनी मंजूरी देने के बजाय वजीर-ए-आला से ही जवाब तलब कर लिया। इससे पहले भी एक धर्मगुरु वजीर को झटका दे चुके हैं, जिस पर वजीर काफी दिनों तक सरकार से खफा भी रहे थे।