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पूरे हफ्ते बिखरेगा हिंदी का जादू

Tue, 16 Sep 2014 01:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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हिंदी महज राजभाषा नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने का जरिया है। रोजगार की उम्मीद है तो फासलों को मिटाने की भाषा है।
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भोजपुरी, मैथिली, अवधी आदि हिंदी की छोटी बहनें हैं, जिनकी तरक्की से हिंदी का फलना-फूलना तय है। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में जहां एक ओर शहरभर में काव्यपाठ हुए, वहीं संस्थानों में हिंदी पखवाड़े की शुरुआत पर लोगों ने संकल्प भी लिए।

चेतना साहित्य परिषद की ओर से काव्यगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें अरविंद असर, अरविंद झा, रमाशंकर सिंह, हितेश शर्मा ने रचनाएं सुनाईं।

इसके अलावा प्रमोद द्विवेदी, आशुतोष बाजपेई, अशोक कुमार ने भी काव्यपाठ किया। उपनिधि साहित्यिक संस्था की काव्यगोष्ठी में देवकी नंदन शांत ने ‘भाषा के सूने भाल पर बिंदी लगाइये, हिंदी में गुनगुनाइए हिंदी में गाइये...’ कविता पाठ किया।
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इसे अलावा शारदानंदन, देवकी नंदन शांत, डॉ. नरेश कात्यायन, राम नरेश पाल ने रचनाएं पढ़ी। रेल दावा अधिकरण में अधिकरण के अपर रजिस्ट्रार विनोद कुमार ने राजभाषा सप्ताह का उद्घाटन किया।
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भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के हिंदी पखवाड़े का उद्घाटन महाप्रबंधक डीएस चौहान ने किया। उन्होंने कहा कि अधिकाधिक हिंदी का प्रयोग करने की जरूरत है।

इस अवसर कवियों को सम्मानित भी किया गया। भारतीय मानक ब्यूरो के हिंदी पखवाड़े में शाखा प्रमुख डॉ. राजेश कुमार बजाज ने कार्यालय में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने की बात कही।
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