छोटे और बड़े साहब की जोड़ी आजकल खासी चर्चा में है। दोनों ही पुलिस विभाग के आला अफसर हैं।
यह बात और है कि एक शासन में हैं और एक पुलिस विभाग में। दोनों के पास मीडिया मैनेजमेंट जैसी अहम जिम्मेदारी भी है। अमूमन नियमित ब्रीफिंग में छोटे साहब ही मीडिया से रू-ब-रू होते हैं।
छोटे साहब काफी संतुलित और संयम से अपनी बात करते हैं जबकि बड़े साहब संजीदा होने के बावजूद तेजी दिखाने के चक्कर में कई बार ट्रैक से भटक जाते हैं।
उनकी इस फितरत के चलते ज्यादातर मामलों में छोटे साहब ही आगे कर दिए जाते हैं और बड़े साहब बैकग्राउंड में रहकर मंद-मंद मुस्कुराते रहते हैं। गाहे-बगाहे बड़े साहब फंस भी जाते हैं।
पहले तो उनकी कोशिश सामने वाले पर हावी होने की रहती है लेकिन सफल नहीं हो पाते हैं तो ऐसी चीजें भी उजागर कर डालते हैं जिसकी उम्मीद भी नहीं होती। नरम-गरम की यह जोड़ी अपना काम बखूबी कर रही है।