श्राद्ध पक्ष में पुरखों की आत्मा की तृप्ति के लिए प्रतीक रूप में पानी, दूध, भोजन, मिष्टान्न आदि अर्पित किए जाते हैं। जो लोग ज्यादा व्यवस्था नहीं कर पाते, वे भी पीपल के पेड़ या मंदिर में जल चढ़ाकर पुरखों की आत्मा की शांति की कामना कर लेते हैं।
पता नहीं केंद्र सरकार के एस्टेट विभाग और हैंडपंप वालों को क्या सूझी कि श्राद्ध पक्ष में ही पानी बंद करने पर तुल गए। दिल्ली की हुकूमत ने 12, तुगलक रोड का बिजली-पानी क्या कटवाया, ‘हैंडपंप’ से पानी निकालने वाले दिल्ली का पानी ही रोकने पर उतारू हो गए।
अब कौन बताए कि जिस कोठी को चौधरी चरण सिंह के निधन के 27 बरस बाद उनका स्मारक बनाने की मांग की जा रही है, उनका श्राद्ध तो पानी कटने से एक दिन पहले ही हो चुका था।
पहले ‘हैंडपंप’ वालों के साथ रहे एक नेता कहते हैं, उन्होंने चौधरी साहब के जन्म शताब्दी वर्ष 2002 में उनका स्मारक बनवाने की मांग उठाई थी, पर गौर नहीं किया गया।
निसंदेह, चौधरी साहब महान नेता थे, लेकिन 29 मई और 23 दिसंबर के अलावा उन्हें याद करने की फुर्सत किसे है?