बसपा को छोड़ तकरीबन हर दल उपचुनावों के लिए कमर कस रहा है।
दलों के दफ्तर गुलजार हो गए हैं। मंत्रियों, नेताओं को पखवाड़े भर का काम मिल गया है।
कोई भोजपुरी अंदाज से रूबरू होगा और कोई पश्चिमी यूपी की खड़ी बोली वाले मिजाज से। पर, देश पर सबसे लंबे समय तक राज करने वाली पार्टी के प्रदेश कार्यालय में इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है।
दफ्तर के माहौल से लगता नहीं कि चुनाव होने वाला है।
चुनावी मौसम में इतना सन्नाटा सूबे में पार्टी की दशा बताने के लिए काफी है। दरअसल, पार्टी लोकसभा चुनाव में इतनी बुरी तरह हारी कि उससे उबर ही नहीं पा रही है।
उपचुनाव में भी पार्टी को कोई खास उम्मीद नहीं दिख रही है। पार्टी के बड़े नेता भी कार्यकर्ताओं में जोश भरने के बजाय घर बैठकर आराम फरमा रहे हैं।
अब जब वरिष्ठ नेताओं का यह हाल है तो पार्टी की नैया प्रदेश में डूबने से भला कौन बचा सकता है...।