कई बार संवैधानिक संस्था के उच्च पदों पर बैठे लोग बयान देते समय अपनी मर्यादा तक भूल जाते हैं। ऐसे ही एक संवैधानिक संस्था के अध्यक्ष ने एक बयान देकर खुद मुसीबत मोल ले ली है।
बात पिछले दिनों की है जब सूबे के वजीर व एक धर्मगुरु के बीच वाक्युद्ध चल रहा था।
वजीर व धर्मगुरु दोनों के ही समर्थकों ने मोर्चा संभाल रखा था। इसी बीच एक संवैधानिक संस्था के मुखिया से भी नहीं रहा गया।
उन्हें वजीर का एहसान उतारने का यही अच्छा मौका दिखा। लिहाजा उन्होंने आव देखा न ताव, एक विवादित बयान दे डाला।
उन्होंने कहा कि वे सफेद लिबास पहनते हैं इसलिए उनका दामन पाक साफ है। जबकि धर्मगुरु काला लिबास पहनते हैं इसलिए उनके बारे में क्या कहा जाए।
अब उन्होंने खां साहब की मोहब्बत में बयान देते समय यह भी ध्यान नहीं दिया कि वे अब वजीर के आम समर्थक नहीं बल्कि संवैधानिक संस्था के उच्च पद पर आसीन हैं।