बगैर मीटर वाले करीब 50 लाख ग्रामीण व शहरी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने इनके लिए औसत खपत का मानक तय कर दिया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में नॉरमेटिव बिलिंग नहीं होगी। उनसे हर माह 180 रुपये प्रति किलोवाट वसूली की जाएगी। वहीं, शहरी उपभोक्ताओं के लिए औसत खपत का मानक 155 यूनिट प्रति किलोवाट से घटाकर 108 यूनिट प्रतिमाह कर दिया गया है।
साथ ही आयोग ने पावर कॉर्पोरेशन को शहरी क्षेत्र के सभी अनमीटर्ड उपभोक्ताओं के यहां 31 अक्तूबर तक मीटर लगाने का निर्देश दिया है। इसके बाद बिजली कंपनियां बिना मीटर वाले उपभोक्ताओं से बिल नहीं वसूल सकेंगी।
नॉरमेटिव बिलिंग को लेकर स्वत: संज्ञान कार्यवाही पर नियामक आयोग ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया। 11 अगस्त को सुनवाई के बाद आयोग ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
आयोग ने जताई नाराजगी
आयोग के अध्यक्ष देश दीपक वर्मा व सदस्य आईबी पांडेय ने अपने आदेश में शहरी अनमीटर्ड उपभोक्ताओं के यहां दो माह में मीटर न लग पाने पर नाराजगी जताते हुए तीन माह का वक्त और दिया है।
आयोग ने आदेश में कहा है कि जिन उपभोक्ताओं से मीटर की कीमत जमा कराने के बाद भी शहरी क्षेत्र में 155 यूनिट प्रति किलोवाट प्रतिमाह व ग्रामीण क्षेत्र में 108 यूनिट प्रति किलोवाट के हिसाब से वसूली हो रही है, वह गलत है।
आयोग ने साफ कर दिया है कि ग्रामीण घरेलू अनमीटर्ड उपभोक्ताओं के लिए नॉरमेटिव बिलिंग का आदेश लागू नहीं होगा। इन उपभोक्ताओं से आयोग द्वारा तय टैरिफ के अनुसार 180 रुपये प्रति किलोवाट प्रतिमाह की दर से ही वसूली की जाएगी।
वहीं, जिन शहरी घरेलू अनमीटर्ड उपभोक्ताओं के यहां पिछले दो माह में मीटर लगाए जा सके हैं, उनसे केवल 70 प्रतिशत की ही वसूली की जाएगी। यानी आयोग ने 155 यूनिट का तय मानक घटाकर 108 यूनिट कर दिया है। ऐसे उपभोक्ताओं को 30 जुलाई के बाद मुफ्त बिजली तो नहीं मिलेगी, लेकिन अभी तक वसूल किए जा रहे बिल में 30 फीसदी की कमी जरूर हो जाएगी।
जिन उपभोक्ताओं के यहां मीटर लग जाएंगे, उनकी पिछले तीन महीने की रीडिंग के औसत के आधार पर जितनी अवधि में शहरी क्षेत्र में 155 और ग्रामीण क्षेत्रों में 108 यूनिट के हिसाब से बिलिंग की गई है, उसे संशोधित किया जाएगा।