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निराश शिक्षामित्रों के लिए दिल्ली-लखनऊ से अच्छी खबर

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हाईकोर्ट के फैसले से निराश और आक्रोशित शिक्षामित्रों के लिए एक अच्छी खबर है। आक्रोशित शिक्षामित्रों की बात सुनने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूपी के सीएम अखिलेश यादव तैयार हो गए हैं। ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही है कि शिक्षामित्रों की समस्या का कोई न कोई हल जरूर निकल आएगा।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आंदोलित शिक्षामित्रों से मिलने को तैयार हो गए हैं। यह मुलाकात 18 सितंबर को काशी आगमन पर डीरेका के ऑफिसर्स गेस्ट हाउस में होगी। प्रधानमंत्री कार्यालय से बुधवार देर रात जिला प्रशासन को बताया गया कि पीएम शिक्षामित्रों के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करेंगे। वहीं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 21 सितंबर को सुबह 10 बजे शिक्षामित्रों को अपने सरकारी आवास पर वार्ता के लिए बुलाया है।

हाईकोर्ट द्वारा सहायक अध्यापक से समायोजन निरस्त किए जाने के बाद से शिक्षामित्र आंदोलित हैं। वाराणसी जिला प्रशासन की ओर से इस आशय का एक पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा गया था, जहां से बुधवार रात सूचना मिली कि पीएम शिक्षा मित्रों के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात को तैयार हैं। वाराणसी के डीएम राजमणि यादव ने बताया कि पीएम ने शिक्षामित्रों के प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात का समय दे दिया है। शिक्षामित्र संयम से काम लें और वाराणसी न आएं।
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अखिलेश ने कहा, हम शिक्षामित्रों के साथ अन्‍याय नहीं होने देंगे

उधर, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि राज्य सरकार पूरी तरह से शिक्षामित्रों के साथ है और उनके प्रति अन्याय नहीं होने देगी। मुख्यमंत्री ने बुधवार को बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी के माध्यम से शिक्षामित्रों को यह संदेश कहलवाया।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सोमवार सुबह 10 बजेशिक्षामित्रों को अपने सरकारी आवास पर वार्ता के लिए बुलाया है। शिक्षामित्रों का छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल उनसे बातचीत करेगा। मुख्यमंत्री ने लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में भी कहा कि राज्य सरकार शिक्षामित्रों के साथ है।

नियमों के दायरे में रहकर उन्हें हरसंभव राहत दिलाई जाएगी। अन्य राज्यों में अधिकारियों की टीम भेजकर पता लगाया जाएगा कि वहां शिक्षामित्रों का समायोजन कैसे किया गया है।

बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी ने शिक्षामित्रों को आश्वासन दिया है कि शासन स्तर से जब तक कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं हो जाता है, शिक्षामित्र पूर्व की तरह स्कूलों में पढ़ाते रहेंगे। हाईकोर्ट के आदेश की प्रति अभी नहीं मिली है। प्रति मिलने के बाद इसका कानूनी परीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
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