लखनऊ। पीजीआई स्थित ओपी चौधरी अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर की जीएनएम प्रथम वर्ष की छात्रा राजनंदिनी (20) ने बृहस्पतिवार रात हॉस्टल के कमरे में फंदा लगाकर जान दे दी। आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। परिजनों ने झगड़े का आरोप लगाकर कॉलेज प्रशासन से पूछताछ की मांग की है।
इंस्पेक्टर पीजीआई रविशंकर त्रिपाठी ने बताया कि राजनंदिनी उर्फ गोल्डी मूल रूप से उन्नाव के पुरवा की रहने वाली थी। बृहस्पतिवार रात 9:30 बजे जब वह खाना खाने के लिए नहीं पहुंची तो वार्डन निशा यादव बुलाने के लिए कमरे में पहुंची। कमरा बंद होने पर आवाज दी, पर गेट नहीं खुला।
वार्डन ने अफसरों व पुलिस को सूचना दी। दरवाजे को तोड़ा तो राजनंदिनी को साड़ी से पंखे से लटका देखा। पुलिस ट्रामा-2 ले गई। यहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजन भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने फॉरेंसिक टीम को बुलाया। इंस्पेक्टर का कहना है कि छात्रा के पास कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।
इससे आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। छात्रा के मोबाइल फोन को जांच के लिए कब्जे में ले लिया है। राजनंदिनी के परिवार में कारोबारी पिता सुरेश, मां सावित्री देवी, भाई पुष्पेंद्र,योगेंद्र व बहन प्रीति हैं।
काॅलेज प्रशासन ने परिजनों को बातचीत के लिए शुक्रवार को बुलाया था
राजनंदिनी के भाई योगेंद्र ने बताया कि आखिरी बार बृहस्पतिवार शाम 4:30 बजे परिजनों की राजनंदिनी से फोन पर बात हुई थी। वह डिप्रेशन में थी। बताया कि कॉलेज प्रशासन ने परिजनों को शुक्रवार को बातचीत करने के लिए बुलाया था, पर कारण नहीं बताया था। हादसे के बाद जब पहुंचे तो प्रशासन ने बताया कि राजनंदिनी का किसी से झगड़ा हुआ था। परिजनों का आरोप है कि प्रशासन झगड़े की बात समय से बता देता तो वे लोग बातचीत से मामला निपटा देते। भाई योगेंद्र का आरोप है कि पुलिस से जानकारी मिली थी कि राजनंदिनी के पास से सुसाइड नोट बरामद हुआ है, मगर बाद में इन्कार कर दिया गया। भाई ने जांच व कॉलेज प्रशासन के जिम्मेदारों से पूछताछ की मांग की है।
घर की सबसे लाडली थी राजनंदिनी
छात्रा राजनंदिनी चार भाई-बहनों में सबसे छोटी थी और सबकी लाडली थी। इसी साल परिजनों ने उसका दाखिला ओपी चौधरी अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर में कराया था।