छात्राओं के क्रिकेट, हॉकी और फुटबाल खेलने पर रोक लगाने वाला शिक्षा विभाग बुधवार को बैकफुट पर आ गया।
बेसिक शिक्षा मंत्री अहमद हसन ने ‘अमर उजाला’ में छपी खबर का संज्ञान लेते हुए फटकार लगाई तो जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण मणि त्रिपाठी ने 26 दिसंबर को जारी विवादास्पद आदेश रद्द कर दिया।
अहमद हसन ने कहा कि सपा सरकार बालिकाओं को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं चला रही है। प्रदेश में किसी भी कीमत पर छात्राओं को कमतर समझने वाला आदेश लागू नहीं होगा।
गौरतलब है कि पांच जनवरी तक बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में संकुल स्तरीय और 15 जनवरी तक ब्लॉक स्तरीय खेल प्रतियोगिताएं होनी हैं।
यह दिया गया था फरमान
इसके लिए जारी किए गए आदेश में कहा गया था कि दौड़, कूद, गोला फेंक, चक्का फेंक, खो-खो, कबड्डी में सभी भाग ले सकते हैं पर क्रिकेट, हॉकी, फुटबाल छात्राएं नहीं खेल सकतीं। बुधवार को नए आदेश के अनुसार जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिता के हर खेल में बालक और बालिका समान रूप से भाग ले सकते हैं।
बाल आयोग नोटिस भेजा, स्पष्टीकरण मांगा
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य नाहिद लारी खान ने बताया कि बेसिक शिक्षा निदेशक डीबी शर्मा और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी करके स्पष्टीकरण मांगा गया है। नोटिस का जवाब न देने पर आयोग विभाग के खिलाफ कार्रवाई करेगा।
बेसिक शिक्षा मंत्री अहमद हसन का कहना है ‘समाजवादी सरकार लैंगिक भेदभाव नहीं करती। इस तरह का जो भी आदेश है तो उसे तुरंत वापस लिया जा रहा है।’