कुछ देर बाद अंकिता सिंह भी कमरे में जाने लगी तो दरवाजा अंदर से बंद था। खटखटाने के बावजूद दरवाजा न खुलने पर उसने रोशनदान से झांका तो अंकिता श्रीवास्तव फांसी लगा चुकी थी। इसकी सूचना उसने वॉर्डन व अन्य कर्मचारियों को दी।
स्टाफ की सूचना पर पहुुंची पुलिस ने छानबीन के बाद शव नीचे उतारा। इस बीच अंकिता श्रीवास्तव की बड़ी बहन अर्पिता भी मौके पर पहुंच गई थी। पुलिस अंकिता को इंटीग्रल अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पढ़ाई के डिप्रेशन में की खुदकुशी
पुलिस के मुताबिक, परिवारीजनों ने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है। बताया कि वह पढ़ाई को लेकर संवेदनशील थी। हाल ही में उसका परीक्षा परिणाम भी आया था। जिसमें उसके 83 प्रतिशत नंबर थे। वह अपने नंबरों से खुश नहीं थी।इसे लेकर वह डिप्रेशन में थी। इधर दो-तीन दिन से वह काफी परेशान थी। मंगलवार को अंकिता ने अर्पिता से मोबाइल पर बात की। इसके बाद अर्पिता ने हॉस्टल में जाकर उसे काफी समझाया भी था।
क्षेत्राधिकारी गाजीपुर दीपक कुमार सिंह के मुताबिक, कमरे की तलाशी में छात्रा का मोबाइल मिला। अंतिम कॉल अंकिता ने मां को की थी। अर्पिता ने बताया कि अंकिता ने सुबह मां से बात की थी। उसने कहा कि मम्मी कुछ समझ नहीं आ रहा है। मैं खुदकुशी कर लूंगी। इसके बाद कॉल डिस्कनेक्ट कर दी। अर्पिता के मुताबिक, मां ने कई बार कॉल की, लेकिन रिसीव नहीं हुई। इस पर उन्होंने उसे हॉस्टल भेजा था।
पुलिस के मुताबिक, परिवारीजन पोस्टमार्टम नहीं कराना चाह रहे थे। इसके लिए वह पुलिस पर दबाव बना रहे थे। काफी समझाने के बाद देर शाम परिवारीजन तैयार हुए। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम को भिजवाया गया।