अपहरण के बाद सचिन के घर के बाहर लगी भीड़
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सचिन के पिता संतोष यादव को मुंबई में खोली बेचने पर अच्छी धनराशि मिली थी। इस पैसे पर उनके परिचित रवि की नजर थी। उसने पहले संतोष से दोस्ती कर उसके साथ खाना-पीना शुरू कर दिया। विश्वास में लेने के बाद उसने सचिन को मंगलवार को अपनी प्रेमिका से मिलाने के बहाने बुलाया।
इससे पहले उसने गांव से चोरी की मोबाइल और नया सिम खरीदा था। सचिन को बहला फुसला कर वह गांव में ही स्कूल के पास ले गया और डरा-धमकाकर उसकी मां को फोन कराया। जिसमें 10 लाख की फिरौती देने की बात कही गई। एसपी त्रिवेणी सिंह ने बताया कि इसके बाद सचिन ने कहा कि वो घरवालों को सब कुछ बता देगा।
भेद खुलने के डर से पहले ईंट से सचिन के सिर पर वार किया। इसके बाद मफलर से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। शव छिपाने के लिए उसे कुएं में डाल दिया। घटना में प्रयुक्त ईंट, मफलर और मोबाइल पुलिस बरामद कर ली है। अपहरण और हत्या का खुलासा करते हुए डीआईजी मनोज तिवारी ने बताया कि आरोपी रवि को गिरफ्तार कर लिया गया है।
घटना से आक्रोशित गांव वालों ने पुलिस वालों को खदेड़ लिया। साथ ही गांव के पास माहुल-पवई मार्ग पर जाम लगाकर उच्चाधिकारियों को मौके पर बुलाने की जिद पर अड़े हैं। उग्र लोगों ने जब पुलिस वालों पर पथराव करते हुए उनकी जीप फूंकने का प्रयास किया तो एसओ अहरौला ने ताबड़तोड़ कई राउंड हवा में फायरिंग की।
एसपी प्रो. त्रिवेणी सिंह मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाले। पुलिस शव को कुएं से निकालने से पहले डाग स्क्वाड की टीम को मौके पर बुलाकर जांच पड़ताल करवाई। इसके बाद ही शव को कुएं से बाहर निकाला गया। इसके बाद सचिन शव रात में ही पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया था।
शव की बरामदगी के समय गांव में हुए बवाल को देख कर पुलिस सचिन का अंतिम संस्कार आजमगढ़ में ही कराना चाहती थी। परिजनों पर दबाव बनाने पर ग्रामीण भड़क उठे। उन्होंने गुरुवार सुबह 7 बजे पवई माहुल मार्ग पर फिर जाम लगा दिया।
शव को गांव लाने और यहीं पर अंतिम संस्कार करने की बात पर अड़ गए। इस दौरान ग्रामीणों की ओर से पथराव भी किया गया। बाद में पुलिस ने उनकी मांग मानी और शव को गांव ले आने पर 8:15 बजे जाम को खोला।