रिंकू ने बताया कि बुधवार दोपहर 12 बजे रोशनी बातचीत कर रही थी। थोड़ी देर बाद एक नर्स ने उसे इंजेक्शन लगाया। इसके दस मिनट बाद रोशनी को सांस लेने में तकलीफ होने लगी।
उसे ऑक्सीजन मास्क लगाया गया, पर उसकी मौत हो गई।
डॉक्टरों ने सीपीआर किया, लेकिन सांस वापस न लौटी। इस पर रिंकू ने गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाते हंगामा शुरू कर दिया। बाद में कर्मचारियों ने तीमारदारों को समझाकर मामला शांत कराया।
रिंकू का आरोप है कि दोपहर करीब एक बजे मौत के बाद उसकी बहन का शव विभाग से बाहर स्ट्रेचर पर रख दिया गया। कागजी कार्रवाई पूरी करने में ढाई घंटे बीत गए। इस दौरान शव ऐसे ही पड़ा रहा।
इलाज में लापरवाही नहीं
मरीज को गलत इंजेक्शन नहीं लगाया गया। उसकी हालत गंभीर थी। इलाज में लापरवाही के आरोप बेबुनियाद हैं। -, डॉ. संदीप तिवारी, प्रभारी, ट्रॉमा सर्जरी