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शूटर गिरधारी एनकाउंटर में पुलिस कमिश्नर, डीसीपी, एसीपी और एसओ को नोटिस

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लखनऊ। अजीत सिंह की हत्या के आरोपी शूटर गिरधारी उर्फ कन्हैया विश्वकर्मा की पुलिस रिमांड के दौरान मुठभेड़ में मौत को लेकर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दाखिल परिवाद में बृहस्पतिवार को सुनवाई की गई। इसमें जिला न्यायाधीश दिनेश कुमार शर्मा ने पुलिस कमिश्नर ध्रुवकांत ठाकुर, डीसीपी संजीव सुमन, एसीपी प्रवीण मालिक और थानाध्यक्ष विभूतिखंड चंद्रशेखर सिंह को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने मामले में सुनवाई के लिए 19 फरवरी की शाम साढ़े 4 बजे का समय तय किया है।
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कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस आशय का नोटिस जारी की जाए कि 19 फरवरी को शाम चार बजे तक पुलिस उपायुक्त संजीव सुमन, सहायक पुलिस आयुक्त प्रवीण मलिक और इंस्पेक्टर विभूतिखंड चंद्रशेखर सिंह व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होकर अपना-अपना शपथ पत्र दाखिल करें कि उनके द्वारा इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित दिशा निर्देशों का पालन किया गया है या नहीं। हालांकि कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को अदालत में हाजिर होने से छूट दी है।कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह वादी एवं मृतक कन्हैया विश्वकर्मा के भाई राकेश विश्वकर्मा को प्रताड़ित नहीं करेंगे।
पहले 20 को होनी थी सुनवाई
गिरधारी के भाई राकेश विश्वकर्मा की ओर से उनके वकील प्रांशु अग्रवाल ने बुधवार को परिवाद दाखिल किया था जिसकी सुनवाई 20 फरवरी को होनी थी लेकिन बृहस्पतिवार को वादी के वकील ने मामले की गंभीरता को लेकर तुरंत सुनवाई किए जाने की मांग करते हुए एक अर्जी कोर्ट में दी और कहा कि वादी के भाई की मुठभेड़ में हत्या करने के बाद पुलिस अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित दिशा निर्देशों का पालन नहीं किया और महत्वपूर्ण दस्तावेजों में छेड़छाड़ की जा रही है। कोर्ट में कहा गया कि गिरधारी विश्वकर्मा की पुलिस द्वारा कथित एनकाउंटर में हत्या कर दी गई है जबकि गिरधारी सीजेएम के आदेश से पुलिस कस्टडी रिमांड में था।
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सर्वोच्च न्यायालय की निर्देशों का दिया हवाला
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि पुलिस एनकाउंटर में यदि किसी व्यक्ति की जान जाती है या उसे गंभीर चोट आती हैं, तब ऐसे मामलों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने 16 दिशा निर्देश जारी किए हैं और उन निर्देशों को देखते हुए मामले में जल्द सुनवाई किए जाने का मामला पाया जाता है। कोर्ट ने कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के दिशा निर्देश संख्या एक के अनुसार, यदि पुलिस को किसी अपराधी की गतिविधियों के बाबत कोई सूचना मिलती है तो वह उसे लिखित रूप से दर्ज करेगा। निर्देश संख्या दो के अनुसार, सूचना मिलने के उपरांत यदि मुठभेड़ में पुलिस द्वारा आग्नेयास्त्र का इस्तेमाल होता है और उसमें यदि किसी की मृत्यु हो जाती है तो ऐसे मामले की तुरंत एफ आईआर दर्ज कर उसे अविलंब न्यायालय को भेजना होगा।
सत्र न्यायाधीश ने भेजी आदेश की प्रति
गाइडलाइन संख्या 16 में यह प्रावधान है कि ऐसे मामलों को सुने जाने का क्षेत्राधिकार संबंधित सत्र न्यायाधीश को होगा जो मृतक की ओर से दाखिल परिवाद पत्र की सुनवाई करेगा। यह भी कहा गया है कि सत्र न्यायाधीश को यह देखना होगा कि मामले की निष्पक्ष जांच हो रही है अथवा नहीं। इस मामले में सत्र न्यायाधीश ने आदेश की एक प्रति मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को भेजते हुए कहा है कि वह इस न्यायालय को सूचित करेंगे कि एफ आईआर की कॉपी व दूसरे आवश्यक दस्तावेज सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों के अनुसार शाम चार बजे तक पुलिस की ओर से उन्हें भेजे गए हैं या नहीं।
सर्वोच्च न्यायालय की गाइडलाइंस 3 के अनुसार मामले की स्वतंत्र विवेचना अपराध शाखा द्वारा अथवा नजदीकी थाने के उस पुलिस अधिकारी द्वारा की जाएगी जो एनकाउंटर टीम के वरिष्ठ अधिकारी के पद से वरिष्ठ पद पर हो। इसी प्रकार गाइडलाइन संख्या 5 के अनुसार घटना की सूचना बिना देर किए हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग अथवा राज्य मानवाधिकार आयोग को दी जाएगी ।सातवीं गाइड लाइन के अनुसार बिना देर किए एनकाउंटर के तुरंत बाद मामले की एफ आई आरए केस डायरीए पंचायत नामा एवं नक्शा नज़री संबंधित कोर्ट को भेजा जाएगा।
इसी प्रकार गाइडलाइन संख्या 13 के अनुसार मुठभेड़ करने वाला पुलिस अधिकारी तुरंत अपने असलहे को फॉरेंसिक जांच के लिए जमा कर देगा जिसकी विवेचना में आवश्यकता होगी। जबकि गाइडलाइन संख्या 16 में यह प्रावधान है कि ऐसे मामलों को सुने जाने का क्षेत्राधिकार संबंधित सत्र न्यायाधीश को होगा जो मृतक की ओर से दाखिल परिवाद पत्र की सुनवाई करेगा। यह भी कहा गया है कि सत्र न्यायाधीश को यह देखना होगा कि मामले की निष्पक्ष जांच हो रही है अथवा नहीं ।
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