वक्त बदलते देर नहीं लगती। कभी यही पुलिस गायत्री के इशारे पर चलती थी। उसके इर्द-गिर्द सुरक्षा का घेरा बनाए रहती थी। उसका हुक्म बजाती थी। बुधवार को वही पुलिस गायत्री को गिरफ्तार कर जेल ले जा रही थी।
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गायत्री को जब सुबह करीब तीन बजे के आसपास पकड़कर आलमबाग कोतवाली ले जाया गया तो उसका चेहरा जर्द था और हाथ-पैर कांप रहे थे। उसके मुंह से शब्द नहीं निकल पा रहे थे। सुबह सात बजे तक उसकी यही स्थिति रही। जब गायत्री के करीबी और समर्थक कोतवाली के बाहर पहुंच गए तब वह थोड़ा संयत हुआ। अपनों को देखकर गायत्री के चेहरे पर राहत नजर आई।
हजरतगंज कोतवाली में उसकी मुस्कुराहट लौटी। इस बीच कोतवाली के भीतर समर्थकों और मीडियाकर्मियों का जमावड़ा लग गया। समर्थकों की गाड़ियों से सड़क जाम हो गई। करीब 11 बजे एसएसपी हजरतगंज कोतवाली पहुंची और गायत्री से चंद मिनट की बातचीत के बाद उसे कोर्ट ले जाने के आदेश दिए।
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गायत्री को पुलिस जीप में बैठाने के लिए काफी जद्दोजहद हुई। समर्थक उसे लग्जरी कार से कोर्ट ले जाना चाहते थे लेकिन एसएसपी ने सख्ती से मना कर दिया। भारी धक्का-मुक्की के बाद उसे पुलिस जीप में बैठाकर कोर्ट ले जाया गया।
अफसरों ने की लंबी पूछताछ
गायत्री प्रसाद प्रजापति
- फोटो : amar ujala
कोर्ट ले जाते समय गायत्री के समर्थकों की लग्जरी कारों का काफिला पुलिस जीप के पीछे-पीछे चलता रहा। कचहरी परिसर में भी गायत्री की सकुशल पेशी के लिए भारी पुलिस बल मौजूद था।
कोर्ट से जेल तक गायत्री के करीब 400 करीबी व समर्थक दर्जनों लग्जरी कारों से उसके साथ गए। जेल गेट पर घंटों समर्थकों का जमावड़ा लगा रहा।गायत्री को पकड़ने के बाद आलमबाग कोतवाली ले जाया गया था।
जहां विवेचक सीओ आलमबाग अमिता सिंह सहित एएसपी पूर्वी शिवराम यादव, सीओ हजरतगंज अवनीश कुमार मिश्रा सहित अन्य अधिकारियों ने उससे लंबी पूछताछ की।
चित्रकूट की महिला ने रेप और नाबालिग बेटी के यौन शोषण का आरोप लगाते हुए गायत्री व उसके करीबी अमेठी निवासी लेखपाल अशोक तिवारी, निजी सचिव रजनीखंड शारदानगर के रूपेश्वर उर्फ रूपेश, गीतापल्ली इको गार्डन निवासी बिजनेस पार्टनर विकास वर्मा
गोमतीनगर के विकासखंड में रहने वाले अमरेंद्र सिंह पिंटू, कानपुर के नौबस्ता में रहने वाला आशीष कुमार शुक्ला और जानकीपुरम सेक्टर ए सीतापुर रोड निवासी गनर हेड कांस्टेबल चंद्रपाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गौतमपल्ली थाना में एफआईआर दर्ज कराई थी।
गायत्री के पहले ही अन्य सभी आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी थी। गायत्री प्रजापति और उनके छह साथियों के खिलाफ जिन धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है, उसमें जु्र्म साबित होने पर आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।
कानून के जानकारों ने बताया कि गैंगरेप की धारा 376 डी में आजीवन कारावास जुर्माना अथवा दोनों की सजा सुनाई जा सकती है। जबकि जान की धमकी में सात साल की सजा है। गाली गलौज की धारा में अधिकतम दो साल की सजा हो सकती है।