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कूड़े में ही कर दिया 20 करोड़ रुपये का घपला

Sat, 06 Aug 2016 02:25 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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मशीन - फोटो : amar ujala
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नगर निगम ने कूड़े के साथ सरकारी बजट को भी ठिकाने लगाया है। चौंकिए नहीं, अकाउंटेंट्स जनरल इलाहाबाद की टीम की दस्तावेज की जांच में करीब 20 करोड़ रुपये का घपला सामने आया है।
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टीम ने टिपिंग फीस मनमाने तरीके से बढ़ाए जाने पर सवाल खड़े किए हैं। सवाल खड़े किए गए हैं कि प्रॉसेसिंग प्लांट की दूरी बढ़ने के बाद भी टिपिंग फीस 862 रुपये प्रति मीट्रिक टन ही बढ़ाया जाना चाहिए था।

पर नगर निगम की नजरें इनायत रहीं और टिपिंग फीस तीन गुना से ज्यादा बढ़ाकर 1604 रुपये कर दिया गया। ऐसा कंपनी को फायदा पहुंचाने की नीयत से किया गया।  ज्योति इनवायरो ने चार साल से कूड़ा उठाया पर न तो इस कंपनी ने और न ही नगर निगम ऑडिटर्स के सामने कोई डाटा पेश कर सका।
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नगर निगम के अकाउंट्स और खर्चों की जांच के लिए ऑडिटर्स  की टीम करीब एक महीने से राजधानी में थी। जांच में शिवरी प्लांट को चलाने और डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन में हो रहे खर्च की जांच में गड़बड़ियां  मिलीं।

इसके लिए नोटिस भी नगर निगम को दिया गया है।  शिवरी प्लांट, कूड़ा ट्रांसफर स्टेशनों का मुआयना भी ऑडिटर्स की टीम ने किया। यहां भी उन्हें खराब हालात ही मिले। ऐसे में कूड़े के निस्तारण के नाम पर बड़े घपले की तरफ ऑडिटर्स का ध्यान गया।

एक आकलन के मुताबिक केवल संचालन में ही 20 करोड़ रुपये का घपला सामने आया है। इसके अलावा करीब 50 करोड़ रुपये शिवरी प्लांट लगाने पर सरकारी फंड से खर्च किए जा चुके हैं।
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डाटा दिए जाने में रहे असमर्थ

डेमो - फोटो : अमर उजाला
नगर निगम को दिए नोटिस में साफ तौर पर कहा गया है कि कंपनी को ठेका दिए जाने के समय अनुबंध में 562 रुपये प्रति मीट्रिक टन तय किया गया था। 2015 में टिपिंग फीस को बढ़ाने की मांग शुरू हुई।

इसके पीछे प्लांट की दूरी करीब 13 किमी बढ़ने से खर्चा बढ़ना बताया गया। ऑडिटर्स की आपत्ति है कि इसके बाद भी 862 रुपये से अधिक टिपिंग फीस नहीं हो सकती थी।

ऐसे में 1604 रुपये टिपिंग फीस देकर नगर निगम और सरकारी खजाने को नुकसान ही पहुंचाया जा रहा है। कंपनी ने कहा-हार्ड डिस्क क्रैश हो गई, इसलिए डाटा नहीं दे सकते। 

चार साल में कितना डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन हुआ, कितना यूजर चार्ज वसूला गया, कितना कूड़ा निस्तारित हुआ, इसको लेकर ऑडिटर्स ने नगर निगम से सवाल किए।

इस डाटा को नगर निगम ने कंपनी ज्योति एनवायरो से भी मांगा। कंपनी ने नगर निगम का जवाब दे दिया कि उसकी हार्ड डिस्क क्रैश होने की वजह से डाटा दिया जाना संभव नहीं है।

वहीं नगर निगम के पास भी यह डाटा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में ऑडिटर्स को बिना डाटा लिए ही वापस जाना पड़ा। वहीं निगम के पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण का कहना है कि केवल दूरी ही टिपिंग फीस बढ़ने की वजह नहीं है।

नया बिजनेस प्लान भी लागू हुआ। इससे कंपनी को वाहनों और स्टाफ की संख्या बढ़ानी पड़ी। इस खर्च की भरपाई केलिए टिपिंग फीस बढ़ाई जानी जरूरी थी।

पूरे देश के नगर निगमों की स्टडी करने के बाद ही 1604 रुपये टिपिंग फीस पर सहमति लखनऊ नगर निगम ने बनाई। डाटा हमारे पास नहीं है जिसे ऑडिटर्स को दिया जा सकता।
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