राजधानी की जलापूर्ति व्यवस्था को सुधारने का काम अब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में होगा। स्मार्ट सिटी के लिए बन रही कंपनी ही इस काम को कराएगी। केंद्र सरकार के नए निर्देश पर अब जलापूर्ति को सुधारने का काम केवल कैसरबाग तक ही सीमित नहीं रहेगा।
क्षेत्र आधारित विकास के साथ पूरे शहर में जलापूर्ति के ढांचे को सुधारा जाएगा। नॉन रेवेन्यू वाटर पर अंकुश लगाने के लिए पूरे शहर में वाटर मीटर लगाए जाएंगे।
नगर निगम के स्मार्ट सिटी में शामिल होने के बाद पूरे शहर में पानी की आपूर्ति को बेहतर करना है। यह काम लखनऊ स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी एक कंसल्टेंट एजेंसी की मदद से करेगी। कंसल्टेंट का चयन एलएससीएल ही करेगी।
इसके लिए गाइडलाइन भी केंद्र सरकार ने भेज दी है। कंसल्टेंट का काम शहर में सर्वे करने के बाद जलापूर्ति में आ रही समस्याओं का चिह्नित करना होगा। मीटर लगाने की संभावना पर भी कंसल्टेंट काम करेगा।
सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर कंसल्टेंट तीन से पांच साल की योजना बनाकर एलएससीएल को देगा। इस योजना को अमली जामा पहनाने की जिम्मेदारी एलएससीएल की होगी। इसके लिए जरूरी बजट का इंतजाम अमृत योजना में मिले फंड से किया जाएगा।