नमामि गंगे परियोजना में गंगा को साफ करने की कवायद को इलाहाबाद में संगम पर झटका लगा है। बुधवार को संगम पर स्नान करने पहुंचे श्रद्धालुओं को गंगा का पानी लाल रंग में मिला। यहां गंगा में मछलियां भी मरी पाई गईं।
अब यूपीपीसीबी की टीम ने पानी का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा है। वहीं लखनऊ स्थित यूपीपीसीबी के बोर्ड अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू करा दी है। इसके लिए इलाहाबाद के क्षेत्रीय अधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई है।
इलाहाबाद में पिछले दिनों मछलियों और साइबेरियन पक्षियों के मरने की घटना सामने आने के बाद बुधवार को संगम में गंगा जल का रंग अचानक लाल हो गया। इससे चिंतित श्रृद्धालु बिना स्नान किए ही वापस लौट आए।
स्थानीय लोगों के मुताबिक सुबह तकरीबन छह बजे के आसपास दारागंज स्थित मोरी गेट से संगम तक गंगा जल का रंग पूरी तरह से लाल हो गया। वहीं यमुना में किलाघाट के पास छह सौ मीटर के दायरे में झाग दिखाई देने लगा। इसकी वजह से गंगा में बड़ी संख्या में मछलियां भी मरी मिलीं हैं।
अफसर हैरान, समझ नहीं पा रहे क्या करें?
इस घटना ने माघ मेला प्रशासन भी परेशान कर दिया है। मेले का आयोजन बेहद नजदीक है और अफसरों को समझ नहीं आ रहा कि क्या किया जाए?
गंगा नदी का जल लाल देखकर परेशान स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना समाजसेवी कमलेश सिंह को दी। लंबे समय से गंगा-यमुना की सफाई के मुद्दे को लेकर संघर्ष कर रहे कमलेश तत्काल संगम नोज पहुंचे।
इसके बाद उन्होंने कमिश्नर, डीएम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को इसकी सूचना दी। उन्होंने कमिश्नर और डीएम के कैंप ऑफिसों में शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि गंगा में कानपुर की टेनरियों से लगातार प्रदूषित पानी आ रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एसबी फ्रैंकलीन का कहना है कि सूचना मिलने के बाद संगम से गंगा जल का नमूना लिया गया है। इसकी रिपोर्ट आने में तीन दिन लगेंगे। बिना रिपोर्ट आए इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।
पर्यावरण विभाग से मांगी रिपोर्ट
वहीं, यूपीपीसीबी के सदस्य जेएस यादव का कहना है कि संगम पर लाल रंग का पानी मिलना बहुत गंभीर मामला है। अगर मछलियां मरने की बात है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
हम क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी से इस मामले पर रिपोर्ट मांग रहे हैं। इसके बाद हकीकत सामने आने पर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।