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यूपी के सरकारी 'दामाद' के 25 ठिकानों पर छापा!

Thu, 27 Nov 2014 01:32 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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मायाराज में नोएडा अथॉरिटी के बॉस रहे यादव सिंह पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने बड़ा छापा मारा है। नोएडा, दिल्ली, गुड़गांव और गाजियाबाद में यादव के करीब 25 ठिकानों पर छापेमारी की गई है।
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यादव सिंह मायावती के खास रहे हैं। अखिलेश सरकार ने भी उन्हें नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे में तैनाती दे दी है। खबरों के मुताबिक, यादव सिंह के सभी साथी फोन बंद करके गायब हैं। यादव के पास 20 से ज्यादा बोगस कंपनियां मिली हैं। सूत्रों के मुताबिक, कालेधन को सफेद धन में बदलने के लिए ये बोगस कंपनियां शुरू की गई थीं।

गुरुवार देर शाम इनकम टैक्स विभाग प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा। बता दें कि यादव सिंह मायावती के खास रह चुके हैं। अब अखिलेश सरकार में भी इनकी काफी मौज रही है। यादव के पास एक साथ 3 अथॉरिटीज का चार्ज है। शायद यही वजह है कि सरकारी महकमों ने इन्हें सरकारी दामाद की नजर से देखा जाता है।
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954 करोड़ की परियोजना में धांधली का आरोप

बीते दिनों लगभग 954 करोड़ की परियोजना में धांधली के आरोपी रहे नोएडा अथॉरिटी के पूर्व मुख्य अभियंता यादव सिंह को एक बार फिर नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेस वे अथॉरिटी में तैनाती मिली।
 
दिलचस्प बात ये है कि सत्ता में आते ही सपा सरकार ने यादव सिंह पर विभागीय जांच बैठाकर उन्हें निलंबित कर दिया था। उन पर नोएडा के सेक्टर-39 थाने में विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ और सीबीसीआईडी की जांच भी हुई।

बसपा सरकार में बेहद प्रभावशाली रहे यादव सिंह पर खुलेआम नियमों का उल्लंघन करने का आरोप था। उन्होंने तिरुपति कंस्ट्रक्शंस और जेएसपी ग्रुप को कई ठेके बगैर नियमों की पालना किए ही दे दिए।

इस मामले में मुख्य अभियंता यादव सिंह और परियोजना इंजीनियर रामेंद्र के साथ इन दोनों कंपनियों के खिलाफ 15 जून 2012 को मुकदमा दर्ज हुआ था।
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सपा सरकार ने ‌कर दिया था निलंबित

सपा सरकार ने सत्ता में आने के महज दो महीने के भीतर यादव सिंह के खिलाफ विभागीय जांच बैठाकर उन्हें निलंबित कर दिया था।

मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने यादव सिंह के घर पर दबिश भी दी पर वह नहीं मिले थे। ऐसे ही नोएडा विकास प्राधिकरण की ओर से यादव सिंह के घर पर उन्हें निलंबित किए जाने का नोटिस चस्पा कराया गया था।

पर, नवंबर 2013 में यादव सिंह का निलंबन वापस हो गया। जबकि तत्कालीन सीईओ रमा रमण ने बयान दिया था कि छह महीने से अधिक का समय बीत जाने की वजह से निलंबन वापस हुआ है।

लेकिन जब तक उनके खिलाफ चल रही अन्य जांच पूरी नहीं हो जाती, उन्हें किसी पद की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। पिछले दिनों उनके खिलाफ सीबीसीआईडी जांच भी समाप्त हो गई। सीबीसीआईडी ने यादव सिंह पर लगे आरोपों को सही नहीं पाते हुए जांच बंद की।

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