तेलीबाग के अग्निहोत्री अस्पताल स्टांप पेपर के सहारे मरीजों से लूट के लिए अकेले डॉ. विवेक त्रिपाठी ही नहीं बल्कि दस लोगों का गैंग था।
ये गैंग ऐसे मरीजों के घर पहुंचता था जो स्टांप पेपर पर इलाज का शुल्क न चुकाने पर अपना सामान देने की बात स्टांप पेपर पर लिखकर देते थे।
अगर कोई पैसे देने में आनाकानी करता था तो मरीज को कोर्ट और पुलिस में शिकायत की धमकी दी जाती थी। अब इसकी पुष्टि के लिए सीएमओ कार्यालय के अधिकारी मरीजों से पूछताछ करेंगे।
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मालूम हो कि सात अक्तूबर को तेलीबाग में एलोपैथिक अस्पताल को आयुर्वेद के डॉक्टर द्वारा संचालित करने की सूचना के बाद सीएमओ की टीम ने छापेमारी कर कई अनियमितताएं पकड़ी थीं।
टीम ने 25 अक्तूबर को अस्पताल को सील कर दिया था। वहीं, टीम तब दंग रह गई जब उसने अस्पताल के दफ्तर से दस रुपये के कई सादे स्टांप पेपर बरामद किए थे।
टीम ने जांच शुरू की तो कई खुलासे हुए। सूत्रों के मुताबिक, अस्पताल संचालित करने वाला डॉ. विवेक त्रिपाठी पहले तो मरीजों का इलाज करता था। जब तीमारदार पैसे खत्म होने की बात कहता था तो उससे मरीज को ले जाने को कहता था।
मरीज जब इलाज जारी रखने के लिए गिड़गिड़ाता तो वो सादा स्टांप पेपर निकालकर जेवरात और अन्य कीमती सामान एक दिन में अस्पताल में जमा कराने की बात लिखवा लेता था।
वो मरीजों को लगातार ठगता रहा और कीमती सामान कर्मचारियों की मदद से बेचकर इलाज का पैसा वसूला। सीएमओ की टीम ने इसकी सूचना जिला प्रशासन के अधिकारियों और पुलिस को भेजी एफआईआर की कॉपी में दर्ज की है। ताकि जांच में पता चल सके कि डॉ. विवेक ने कितने लोगों को शिकार बनाया है।
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