एक तरफ राज्य सरकार औद्योगिक इकाइयों को लाने के लिए तमाम कोशिशें कर रही
है, वहीं दूसरी ओर नौकरशाही के रवैये से कंपनियां पलायन करने को मजबूर हो
रही हैं।
ताजा मामला टाटा मोटर की टाटा इंजीनियरिंग लोकोमोटिव कंपनी
(टेल्को) का है। टेल्को ने उत्तराखंड के रुद्रपुर में शिफ्टिंग की तैयारी
कर ली है।
अगर कंपनी की शिफ्टिंग को रोका नहीं गया तो लखनऊ और कानपुर में
कंपनी से जुड़ी 40 एंसिलरी यूनिटों पर ताला लग जाएगा। इससे इन यूनिटों
में काम करने वाले तीन हजार लोग तो बेरोजगार होंगे ही साथ ही इन इकाइयों को
लगाने वालों के 400 करोड़ रुपये डूब जाएंगे।
दरअसल
प्रोत्साहन स्कीम को लेकर वादाखिलाफी टाटा मोटर की नाराजगी का कारण है। इस
प्रोत्साहन स्कीम की घोषणा मुलायम सिंह यादव ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल
में की थी।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के महासचिव नीरज सिंघल ने
टेल्को को उत्तराखंड शिफ्ट करने के टाटा मोटर के फैसले का खुलासा करते हुए
सरकार को पत्र लिखा है।
सिंघल ने लघु उद्योग राज्यमंत्री भगवत शरण गंगवार
को लिखे पत्र में टाटा मोटर की नाराजगी का कारण सरकार की वादा खिलाफी बताया
है। उत्तराखंड में टेल्को को वर्ष 2017 तक उत्पादन पर एक्साइज ड्यूटी और
राज्य सरकार के टैक्सों में छूट मिलेगी।
आईआईए
लखनऊ चैप्टर के चेयरमैन प्रशांत भाटिया बताते हैं कि एंसिलरी इकाइयों में
25-25 से लेकर 250-250 कर्मचारी तक कार्यरत हैं। एंसिलरी यूनिट लगाने वाले
उद्यमी लखनऊ, कानपुर, चेन्नई एवं पुणे के हैं।
एक
इकाई में पांच से 50 करोड़ रुपये तक का पूंजी निवेश हुआ है। इन इकाइयों
का सालाना टर्नओवर करीब 500 करोड़ रुपये का है। एंसिलरी यूनिट में प्रमुख
रूप से तीन प्रकार के स्पेयर पार्ट्स बनाकर सप्लाई की जाती है।
इन स्पेयर
पार्ट्स में शीट मेटल, रबड़ और फैब्रीकेटर्स यानी बॉडी के पार्ट शामिल हैं।
टेल्को ने जब से उत्तराखंड जाने का फैसला किया, तब से स्पेयर पार्ट्स
सप्लाई का ऑर्डर कम होता जा रहा है।
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