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परमिट की आड़ में खाए 3.60 करोड़

Mon, 17 Feb 2014 09:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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आलमबाग क्षेत्र के निवासी टैम्पो यूनियन के ‘नेताजी’ हैं। इनके एक भाई आरटीओ में दलालों के किंग कहलाते हैं।
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ये दो नंबर के काम करने के लिए चर्चित हैं। इस दलाल ने अकेले 400 डीजल टैंपो के परमिट दिलाने का ठेका लिया था।

इस दलाल ने आवेदकों से परमिट दिलाने के एवज में औसतन 50-50 हजार रुपये की घूस वसूली है।

ओडियन सिनेमा रोड के कुछ टैंपो डीलरों ने भी 500 से अधिक डीजल टैंपो का परमिट और बैंक से लोन दिलाने के लिए एक-एक आवेदक से 50 से 60 हजार की घूस वसूली।

डीलरों ने एक परमिट के 30,000 रुपये की घूस की रकम ‘ऊपर’ तक पहुंचाई। इसके बाद धड़ाधड़ डीजल टैम्पो परमिट के सेंक्शन लेटर जारी हो गए।

राजधानी में गुपचुप तरीके से 1200 डीजल टैम्पो के परमिट जारी करने की घूसखोरी की यह बानगी है। इस पूरे खेल में दलाल, डीलर व आरटीओ कर्मी सहित अन्य ऑटो और टैम्पो ऑपरेटर यूनियन के पदाधिकारी शामिल हैं।

इनकी सांठगांठ से सिर्फ आरटीओ (संभागीय परिवहन कार्यालय) के अधिकारी परमिट जारी कराने की आड़ में 30 हजार प्रति परमिट के रेट से 3.60 करोड़ रुपये की घूस खा गये।
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अब परमिट न मिलने पर आवेदकों ने घूस की रकम वापस करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है।

इस पूरे मामले का खुलासा परमिट आवेदकों ने किया। एक आवेदक ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि डीलर ने 50 हजार रुपये में परमिट एवं बैंक से लोन मंजूर कराकर टैम्पो निकलवाने का वादा किया था।

इसी बीच परमिट घोटाले से पर्दा उठा तो परमिट जारी होने पर प्रतिबंध लग गया। इससे आवेदकों के कई करोड़ रुपये डीलरों के पास फंस गए।

अब ये डीलर घूस की रकम वापस करने में आनाकानी कर रहे हैं। पीड़ितों के मुताबिक डीलरों का दावा है कि जल्द ही परिवहन मंत्री व परिवहन आयुक्त का घेराव करके परमिट जारी करने का दबाव बनाया जाएगा।

इसलिए वे लोग घूस की रकम वापस नहीं करेंगे। दूसरी तरफ आशियाना के एक आवेदक ने बताया, कि दलालों के किंग ने अक्टूबर 2013 में 1.50 लाख रुपये की घूस लेकर तीन टैम्पो के परमिट दिलाने का वादा किया था।

अब यह दलाल घूस की रकम वापस करने से मना कर रहा है। इसी दलाल और यूनियन की सांठगांठ से 14 फरवरी को आरटीओ का घेराव किया गया, जिसमें काफी संख्या में परमिट के आवेदक ही शामिल थे।
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आवेदक ने बताया कि अब ऑटो व टैम्पो हड़ताल की नोटिस देकर आरटीओ पर परमिट जारी करने का दबाव बनाया जाएगा।

दलालों एवं डीलरों ने लाखों कमाएं
सूत्रों के अनुसार आरटीओ कर्मियों को परमिट जारी करने के लिए सिर्फ 30-30 हजार रुपये घूस दी गई।

जबकि दलालों व डीलरों ने परमिट आवेदकों से 50 से 60 हजार वसूले थे। यानी आवेदकों से परमिट दिलाने की आड़ में 6 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध वसूली हुई है।

सूत्रों के मुताबिक आरटीओ के जिन कर्मियों ने घूस की रकम वसूली की, वे भी अब इसे लौटाने में आनाकानी कर रहे हैं।

यह है मामला
नवंबर में पूर्व संभागीय परिवहन अधिकारी एपी सिंह के कार्यकाल में गुपचुप तरीके से 1200 डीजल टैम्पो परमिट जारी कर दिए गए।

मीडिया ने खुलासा किया तो उच्च स्तरीय जांच के बाद दो लिपिक व आरटीओ एपी सिंह को निलंबित कर दिया गया। अब इस प्रकरण की भ्रष्टाचार निवारण संगठन की इकाई से जांच कराई जा रही है।
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