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कैसे कमाए 36 साल में 1.5 लाख करोड़?

Sat, 01 Mar 2014 05:33 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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गोरखपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स करने वाला 30 साल का नौजवान 1978 में हजार-डेढ़ हजार रुपये से शुरुआत कर 36 सालों में डेढ़ लाख करोड़ से ऊपर का बिजनेस एंपायर खड़ा कर देता है।
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यह बिजनेस टाइकून कोई और नहीं निवेशकों को बीस हजार करोड़ का भुगतान न करने के आरोपी सहारा इंडिया परिवार के चेयरमैन सुब्रत राय सहारा हैं।

फाइनेंस, रीयल एस्टेट, मीडिया, हेल्थकेयर, एंटरटेनमेंट, कंज्यूमर गुड्स और टूरिज्म समेत कई क्षेत्रों में निवेश करने वाले सहारा का बिजनेस साम्राज्य विदेशों तक फैला हुआ है।

बनाए एक से बढ़कर एक स्वप्न लोक

करीब 65 वर्षीय सुब्रत राय ने 1978 में सहारा ग्रुप बनाया। गोरखपुर से कारोबार की शुरूआत की। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।

कई बार चर्चाओं में आए सुब्रत रॉय और सहारा ग्रुप का मुंबई में एंबे वैली सिटी, लंदन में ग्रॉसवर्नर हाउस, न्यूयार्क में न्यूयार्क प्लाजा होटल विश्वस्तरीय सुविधाओं वाले स्वप्न लोक की तरह हैं।

अपनी इस कामयाबी की वजह से टाइम मैग्जीन समेत कई पत्र-पत्रिकाओं के मुख्य प्रष्ठों पर जगह बनाने वाले सुब्रत रॉय के सहारा इंडिया परिवार का हेडक्वार्टर लखनऊ में ही है।

सुब्रत राय ने ग्रुप की शुरुआत सहारा बैंकिंग से करके बड़ी तादाद में जमाकर्ताओं को जोड़ा। इसके बाद तो सहारा ग्रुप के निवेश के सेक्टर बढ़ते चले गए।

दुनियाभर में फैला दिए अपने हाथ

रीयल एस्टेट कंपनी और हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कार्पोरेशन के जरिये बड़े स्तर पर देश भर में जमीन खरीदी, विकसित की और कई आवासीय योजनाएं शुरू की।

लखनऊ के अलावा कानपुर, गोरखपुर, हैदराबाद, भोपाल, कोच्चि, गुड़गांव और पुणे आदि में सहारा ने आवासीय योजनाएं शुरू कीं।

अमेरिकन बिल्डिंग कंपनी से गठजोड़ भी किया। हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं न्यूज और एंटरटेनमेंट चैनल तथा समाचार पत्र प्रारंभ किए। मुंबई में छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सहारा स्टार होटल के साथ दी विदेशों में भी होटल खोले।

डेढ़ साल पहले रिटेल सेक्टर में क्यू शॉप की शुरुआत की। उड़ीसा, झारखंड और छत्तीसगढ़ में बिजली उत्पादन के क्षेत्र में निवेश किया।

एयर सहारा की भी शुरुआत की गई। एजूकेशन केक्षेत्र में सहारा ने हाथ जमाए और राजधानी में साहारा कालेज ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंसेंज समेत शिक्षण संस्थाएं चल रही है।

हॉकी से लेकर फॉर्मूला-1 तक पकड़

लंबे समय तक भारतीय क्रिकट टीम के स्पॉंसर रहा सहारा ग्रुप हॉकी टीम को भी स्पांसर कर रहे हैं। वह फार्मला-वन रेस के बड़े स्टेक होल्डर हैं।

सहारा खिलाड़ियों और फिल्मी हस्तियों के नजदीकियों के लिए चर्चा में रहे हैं। एंबे वैली कई खिलाड़ियों की पसंदीदा जगह मानी जाती है।

सहारा ने लखनऊ में भी खूब निवेश किया। उन्होंने सहारा सिटी, सहारा एस्टेट, सहारा होम्स बनाए। गोमती नगर में 350 बेड का सहारा हॉस्पिटल बनाया।

मॉल कल्चर की शुरुआत में ही हजरंतगंज इलाके में सहारा मॉल बनाया। कई स्थानों पर क्यू शॉप खोलीं।

इनकी सुरक्षा के आगे अ‌खिलेश्‍ा भी फेल

सहारा प्रमुख सुब्रत राय की सुरक्षा के आगे सीएम सिक्योरिटी भी फेल नजर आई। कई प्राइवेट सुरक्षा गार्ड व भारी पुलिस बल उन्हें अपने साथ लेकर कोर्ट पहुंचा।

सहारा के बेड़े में कई विदेशी गाडिय़ा व पुलिस सरकारी वाहन शामिल थे। वकीलों का पैनल भी उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा था।

वहीं पुलिस भी सहारा की आवाभगत में पीछे नहीं रही। कोर्ट के गेट पर पुलिस की स्कार्पियों पहुंचते ही सिपाही व दरोगा अपनी जीप से कूदकर गेट खुलवाने के लिए दौड़े।

पुलिस की स्कार्पियों में बैठे सहारा प्रमुख की गाड़ी अंदर जाते दोबारा गेट बंद कर लिया गया। गेट पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। ताकि कोई भी कोर्ट परिसर में दाखिल न हो सके।

देर शाम कोर्ट के गेट नंबर चार पर सहारा प्रमुख की कई विदेशी लग्जरी वाहनों की कतार लग गई। कुछ देर के लिए कोर्ट मार्ग पर जाम की स्थिति बन गई।

और फिर हो गई गिरफ्तारी

उच्चतम न्यायालय के गैर जमानती वारंट पर अमल करते हुए लखनऊ पुलिस ने सहारा इंडिया के प्रमुख सुब्रत रॉय को आखिरकार गिरफ्तार कर ही लिया। गोमतीनगर पुलिस ने रॉय को सहारा सिटी से गिरफ्तार कर सीजेएम के सामने पेश किया।

कोर्ट ने पुलिस और रॉय के वकील का पक्ष सुनने के बाद उन्हें चार मार्च तक के लिए गोमतीनगर पुलिस की कस्टडी में दे दिया है। पुलिस ने सुरक्षा का हवाला देते हुए रॉय को फिलहाल वन विभाग के कुकरैल गेस्ट हाउस में रखने का फैसला किया है।

इससे पहले कोर्ट के पूछने पर रॉय ने अपने घर पर ही रहने की इच्छा जताई थी। उन्होंने मेडिकल परीक्षण कराने से भी इन्कार कर दिया। सीजेएम कोर्ट ने गोमती नगर थाना प्रभारी को रॉय को उच्चतम न्यायालय में पेश करने के लिए सौंप दिया।

वापस नहीं होगा नॉन बेलेबल वॉरेंट

सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना मामले में सहारा प्रमुख के खिलाफ जारी अपने गैर जमानती वारंट को वापस लेने के सुब्रत राय के आग्रह पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

सर्वोच्च अदालत के समक्ष राय की ओर से दो बार वारंट वापस लेने के संबंध में गुहार लगाई गई। लेकिन अदालत ने अपने आदेश को कायम रखते हुए आग्रह को दोनों बार नकार दिया।

सीजेएम कोर्ट में सुब्रत राय सहारा का एक बयान पढ़ा गया जो कुछ इस तरह है, ‘मेरे ऑफिस, मेरे सहकर्मियों, परिवारजनों के साथ संबंधियों और मीडिया से लगातार फोन और एसएमएस आ रहे हैं। वे मुझसे जानना चाहते हैं। इस बारे में मेरा सिर्फ इतना कहना है कि मेरा देश इससे बेहतर मेरा सम्मान नहीं कर सकता।’

सहारा की सफाई और सेबी पर आरोप

सहारा समूह ने अपनी विज्ञप्ति में कहा है कि सहारा ने सेबी के पास 5,120 करोड़ रुपये जमा कराए हैं। यह रकम निवेशकों को लौटाने के लिए हैं लेकिन यह सेबी के पास जमा पड़े हैं।

बीते 18 माह में सेबी ने केवल एक करोड़ रुपये ही लोगों को दिया है। जहां तक 20,000 करोड़ रुपये की वापसी की बात है, सहारा पहले ही यह रकम लौटा चुका है। इसके प्रमाण में सौ से भी अधिक ट्रकों में कागजात सेबी के पास भेजे जा चुके हैं।

और धड़ाम हुए सहारा समूह के शेयर
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में सहारा वन मीडिया एंड इंटरटेनमेंट का शेयर 2.99 फीसदी की गिरावट के साथ 60.10 रुपये के भाव पर बंद हुआ। जबकि सहारा हाउसिंगफिना कॉरपोरेशन का शेयर 0.65 फीसदी की गिरावट के साथ 38.45 रुपये के भाव पर रहा।
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पढ़िए, क्यों आई गिरफ्तारी की नौबत

सहारा समूह की दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन ने रियल एस्टेट में निवेश करने केनाम पर वर्ष 2008 से 2011 के बीच वैकल्पिक पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर (ओएफसीडी) के जरिए तीन करोड़ से अधिक निवेशकों से 17,400 करोड़  जुटाए थे।

सितंबर, 2009 में सहारा प्राइम सिटी ने आईपीओ लाने केलिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के समक्ष दस्तावेज जमा किए, जिसमें सेबी को कुछ गड़बड़ी का अंदेशा लगा।

इसी बीच सेबी के पास रोशन लाल नाम के एक व्यक्ति की तरफ से सहारा के खिलाफ शिकायत आई। इसके बाद सेबी ने अगस्त, 2010 में दोनों कंपनियों की जांच करने के आदेश दिए थे।
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