जिला एफएसडीए के अभिहीत अधिकारी टीआर रावत ने बताया कि वेजीटेबल, चिली और सोयाबीन सॉस बनाने में इस्तेमाल होने वाली कच्ची सामग्री के दो नमूनों में फफूंद और सिंथेटिक कलर पाया गया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि यह जानलेवा हो सकती है। सॉस की तीन सीलबंद बोतलों में फंगस पाया गया, यह भी सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।
छह नमूने सेहत के लिए खतरनाक तो नहीं पाए गए पर उनकी गुणवत्ता खराब थी। आकांक्षा से लिए गए वेजीटेबल सॉस के नमूने में पेट के साथ हार्ट अटैक का कारण बनने वाले सिंथेटिक कलर की मिलावट पाई गई।
सॉस के नाम पर गंदा खेल
30 नमून लिए गए थे दोनों फैक्ट्रियों से, 20 की रिपोर्ट मिली
4 नमूने सेहत के लिए बेहद खतरनाक पाए गए केशव फूड्स के
1 नमूना जानलेवा पाया गया आकांक्षा फूड प्रोडक्ट का
6 नमूने घटिया गुणवत्ता के पाए गए।
9 नमूने जांच में ठीक पाए गए।
10 नमूनों की जांच रिपोर्ट आनी बाकी है केशव फूड्स की।
एफएसडीए ने दोनों ही फैक्ट्री संचालकों को नोटिस जारी किया है। फैक्ट्री संचालक अगर जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं तो एक माह में रेफरल लैब में अपील कर सकेंगे।
तय मियाद में रेफरल लैब में अपील न करने पर एफएसडीए अधिकारी सेहत के लिए घातक पाए गए नमूनों के लिए एसीजेएम कोर्ट में और घटिया पाए गए नमूनों के लिए एडीएम सिटी पूर्वी की कोर्ट में अलग-अलग वाद दाखिल करेगा।
अभिहीत अधिकारी ने बताया कि सेहत के लिए घातक पाए गए नमूनों से जुड़े वादों में अधिकतम पांच लाख कस जुर्माना सहित जेल की सजा तक का प्रावधान है। जबकि घटिया पाए गए नमूनों के मामले में अधिकतम जुर्माना राजस्व कोष में जमा करवाने की कोशिश होगी।
अभिहीत अधिकारी जांच के बाद टीम ने लैब रिपोर्ट आने तक दोनों ही फैक्ट्रियों में किसी भी तरह के निर्माण व बिक्री कार्य को प्रतिबंधित कर दिया था।
दोनों के फूड लाइसेंस निलंबित कर दिए गए थे। फिलहाल निलंबन की अवधि को आगे बढ़ाते हुए निर्माण व बिक्री कार्य पर रोक कायम रखी जाएगी।
मालूम हो 26 फरवरी को केशव फूड्स पर एफएसडीए टीम ने छापा मारा। यहां इतनी गड़बड़ियां पाई गईं कि तीन दिन तक कार्रवाई चलती रही थी। सॉस व सॉस बनाने की सामग्री से जुड़े 20 नमूने जांच के लिए लैब भेजेे गए थे।
सॉस व सिरका बनाने में इस्तेमाल हो रही सड़ी-गली व फफूंद लगी गाजर, टमाटर व कद्दू से तैयार 340 क्विंटल सामग्री को नष्ट कराने के साथ 25 लाख कीमत की तैयार सामग्री सीज कर दी गई थी।