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डेंगू के इलाज के लिए जल्दी ही बाजार में आएगी वैक्सीन, यूपी का केजीएमयू बनाएगा टीका

Thu, 29 Mar 2018 03:27 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala
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डेंगू के इलाज में अब तक किसी भी प्रकार का वैक्सीन बाजार में उपलब्ध नहीं है, मगर आने वाले समय में इस बीमारी की दवा आ सकती है। इस पर केजीएमयू के कम्युनिटी मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ विभाग शोध कर रहा है।
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यह जानकारी बुधवार को केजीएमयू के कम्युनिटी मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ विभाग के अध्यक्ष प्रो. उदय मोहन ने कही। वह बुधवार को विभाग के 60वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने किया।

प्रो. उदय मोहन ने बताया कि डेंगू के वैक्सीन बनाने को लेकर शोध जारी है। शोध के लिए मऊ,मेरठ, इलाहाबाद तथा हरदोई के लगभग 500 लोगों का ब्लड सैंपल लिया गया है। उस सैंपल में एंटीजन व एंटीबॉडी का लेवल देखा जाएगा।
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उन्होंने बताया कि एंटीजन जब शरीर में जाता है तो उसके विरुद्ध बॉडी एंटीबॉडी का निर्माण करती है, जिसे रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कहते हैं। शरीर में रोग प्रतिरोध क्षमता बढ़ाकर रोगों को रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि एंटीबॉडी के कम ज्यादा होने के आधार पर वैक्सीन बनाने पर काम किया जाएगा।

प्रो. उदय बताया कि केजीएमयू का कम्युनिटी मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ विभाग राष्ट्रीय कार्यक्रमों को संचालित करता है। इसके अलावा तकनीकी योगदान भी प्रदान करता है। स्वास्थ्य निदेशालय द्वारा महामारी आदि के रोकथाम के लिए शोध भी करता है।
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मैटर्नल हेल्थ पर शोध बचा रही जान

केजीएमयू - फोटो : amar ujala
केजीएमयू के कम्युनिटी मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ विभाग के डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि मैटर्नल डेथ का सबसे बड़ा कारण प्रसव के पहले और बाद में अधिक रक्तस्राव होना है। उन्होंने बताया कि प्रसव के समय रक्तस्राव होने पर यदि समय रहते गर्भवती को अच्छे सेंटर पर इलाज मुहैया हो जाये तो मैटर्नल डेथ को कम किया जा सकता है।

1958 में शुरू हुआ था विभाग
डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि 26 दिसम्बर 1957 को प्रदेश सरकार ने शासनादेश पारित किया गया था। 15 मार्च 1958 में विभाग शुरू हुआ। 1972 में विभाग को उच्चीकृत किया गया। विभाग में एमबीबीएस, एमडी, डीपीएच, पीजीडीएमसीएच, इग्नू व सीएचसीडब्ल्यूएम के छात्रों को शिक्षण एवं प्रशिक्षण दिया जा रहा है। देश में यह ही एक मात्र इतना बड़ा विभाग है, जिसके तहत ग्रामीण स्वास्थ्य एवं प्रशिक्षण केंद्र प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, दो प्रयोगात्मक शिक्षण स्वास्थ्य उपकेंद्र तथा अर्बन स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन हो रहा है।

बीमारी के आंकड़े होंगी तभी रोकथाम संभव होगा
केजीएमयू कुलपति डॉ. एमएलबी भट्ट ने कहा कि कम्युनिटी मेडिसिन विभाग लोगों को सेहत के प्रति जागरूक करने में अहम कदम उठा रहा है। यूनिसेफ  ने विभाग में ऑनलाइन डाटा सेंटर स्थापित किया है। ऑनलाइन डाटा सेंटर में ग्रामीण क्षेत्र में किए गए काम दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब बीमारी के आंकड़े होंगे तो उसकी रोकथाम को प्रभावी तरीके से रोकने की रणनीति बनाई जा सकती है।
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