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चार ब्लड बैंक-हॉस्पिटल पर एसटीएफ का फिर छापा, बुजुर्ग बोला- गड़बड़ खून से हुई बेटे की मौत

Wed, 31 Oct 2018 11:54 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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demo pic - फोटो : amar ujala
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लखनऊ में एसटीएफ और एफएसडीए की टीम ने मंगलवार को फिर से चार अन्य अस्पताल और ब्लड बैंकों पर छापा मारकर कई दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया है। दरअसल अखबारों में खबर छपने के बाद मंगलवार को एक पीड़ित सामने आया और उसने एसटीएफ के अधिकारियों को अपनी व्यथा बताई। 

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सीतापुर के रहने वाले एक शख्स ने एसटीएफ के पुलिस उपाधीक्षक अमित नागर को बताया कि पिछले वर्ष उनका 28 वर्षीय बेटे का इलाज गोमतीनगर के फोर्ड हॉस्पिटल में चल रहा था। जहां चिकित्सक ने ब्लड की कमी बताई। छह यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ी।

परिवारीजनों और रिश्तेदारों ने रक्त दान किया। दो यूनिट ब्लड मेडिसन ब्लड बैंक से आया। आरोप है कि मेडिसन ब्लड बैंक से आए ब्लड चढ़ाना शुरू हुआ था कि कुछ देर बाद ही बेटे की मौत हो गई। उक्त शख्स ने आशंका जाहिर की कि उनके बेटे की मौत मेडिसन ब्लड बैंक से आए खून की वजह से ही हुई है।
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उन्होंने पूरे मामले की नए सिरे से जांच की मांग की है। उनका यह भी कहना है कि पिछले सप्ताह पकड़े जाने वाले कर्मचारियों ने ही उन्हें ब्लड उपलब्ध कराया था। उक्त शिकायत के बाद एसटीएफ के अधिकारी अमित नागर और एफएसडीए के अधिकारी पीके मोदी के साथ पहले फोर्ड हॉस्पिटल पहुंचे और फिर मेडिसिन हॉस्पिटल एंड ब्लड बैंक पहुंच कर दस्तावेजों की जांच की गई। 

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एक-एक डोनर का रिकॉर्ड तलब

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सूत्रों का कहना है कि एफएसडीए ने दो अन्य ब्लड बैंक और हॉस्पिटल की भी जांच की है, इसमें बीएनके ब्लड बैंक और कैरियर हॉस्पिटल शामिल हैं। इन बैंकों के भी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। पिछले सप्ताह एसटीएफ और एफएसडीए की टीम ने मेडिसन ब्लड बैंक और बीएनके ब्लड बैंक के कर्मचारियों के घर से खून के पाउच बरामद किए थे।

पूछताछ में कर्मचारियों ने एक बैग खून से सेलाइन मिलाकर दो बैग बनाने की बात कबूली थी। इसके बाद से दोनों ब्लड बैंकों से ब्लड के लेनदेन पर रोक लगा दी गई थी। 

आचार्य रामेंद्र शास्त्री का कहना है कि उन्होंने अमर उजाला में मेडिसन से पकड़े गए कर्मचारियों की फोटो देखी। इसके बाद सिलसिलेवार ब्लड बैंक के कारोबार से जुड़ी खबरें देखी तो माथा ठनका। उसके बाद अखबार लेकर मंगलवार को एसटीएफ के पास पहुंचे। पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। 

एफएसडीए की टीम ने मंगलवार रात जिन ब्लड बैंकों पर छापा मारा, वहां से अप्रैल से अक्तूबर तक के एक-एक डोनर के रिकार्ड मांगे गए हैं। साथ ही यह भी पूछा गया कि ब्लड किसे चढ़ाया गया।  खास बात यह है कि इस छापेमारी में दूसरे जिले के एफएसडीए इंस्पेक्टरों को लगाया गया है। दो जिलों से आए इंस्पेक्टरों ने संबंधित ब्लड बैंकों से बैग खरीद संबंधी दस्तावेज भी सील किए गए हैं। इनकी विस्तार से जांच की जाएगी।

आपात स्थिति में मिल सकता है ब्लड

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इन बातों का रखें ध्यान
- सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंक से ही रक्त लें। उसके पाउच पर ग्रुप, एक्सपायरी नंबर, पंजीयन नंबर देख लें।
- यह भी देखें कि जहां से ब्लड ले रहे हैं वहां की व्यवस्थाएं ठीक हैं या नहीं। बिजली और फ्रीजर की व्यवस्थाएं जरुर देखें।
- ब्लड किसी फैक्ट्री में नहीं बनता है इसलिए रक्तदान करें और उसके बदले रक्त लें।
- यदि निजी ब्लड बैंक से रक्त ले रहे हैं तो देखें कि उसका पंजीयन है या नहीं।

आपात स्थिति में डॉक्टर या ब्लड बैंक प्रभारी से भी निवेदन किया जा सकता है। इसके अलावा हर व्यकित अगर समय-समय पर रक्तदान करता रहे तो ब्लड बैंकों में रक्त की कमी नहीं होगी। रक्तदान करने पर मिलने वाला डोनर कार्ड मिलेग, जिसे दिखाकर आप जरूरत पड़ने पर खून ले सकेंगे। 
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इमरजेंसी में बिना डोनर के मिलता है खून

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केजीएमयू ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ तूलिका चंद्रा ने बताया कि कई बार ऑपरेशन के दौरान मरीजों को अतिरिक्त खून की जरूरत पड़ती है। ऐसे में चिकित्सकों की संस्तुति पर बिना डोनर के भी ब्लड उपलब्ध कराया जाता है। बाद में संबंधित विभाग के कार्डधारी डोनरों के जरिए कागजी कार्रवाई पूरी कर ली जाती है। 

दस्तावेजों का मिलान कराने के बाद होगी कार्रवाई
शिकायत के आधार पर ब्लड बैंक की जांच की जा रही है। सभी दस्तावेज सील कर दिए गए हैं। जिस अस्पताल में मरीज भर्ती था, वहां भी जांच पड़ताल कर स्थिति की जानकारी ली जाएगी। दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - अमित नागर, उपाधीक्षक, एसटीएफ
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