स्कूलों में बांटे जाने वाले मिड-डे मील की सैंपलिंग करीब सालभर से नहीं हुई है। खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की यह लापरवाही मासूमों की सेहत पर भारी पड़ सकती है। यही हाल राशन दुकानों से दिए जाने वाले अनाज व आंगनबाड़ी केंद्रों से बंटने वाली भोजन-नाश्ता सामग्री की गुणवत्ता परखने की नमूना प्रकिया का है।
मिड-डे मील व आंगनबाड़ी केंद्रों से बांटे जाने वाले नाश्ते व भोजन को बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के साथ तैयार खाद्य पदार्थ की नियमित सैंपलिंग कर लैब टेस्टिंग से गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदारी भी एफएसडीए के सुरक्षा अधिकारियों की है।
शासन स्तर से समय-समय पर इन्हें नियमित तौर पर मिड-डे मील के नमूनों की सैंपलिंग के साथ इसमें इस्तेमाल होने वाले राशन, दुकानों के कच्चे अनाज व आंगनबाड़ी केंद्रों में बंटने वाली खाद्य सामग्री की जांच के निर्देश भी हैं। बावजूद इसके एफएसडीए के जिम्मेदार लापरवाही बरत रहे हैं।
जानकारी मांगने पर सामने आई लापरवाही
एफएसडीए के जिम्मेदारों से नमूना सैंपलिंग की जानकारी मांगी गई तो लापरवाही सामने आई। पता चला कि लखनऊ क्षेत्र में जनवरी से अब तक मिड-डे मील, आंगनबाड़ी केंद्र व राशन दुकानों में इस्तेमाल हो रही खाद्य सामग्री का एक भी नमूना लैब टेस्टिंग को जनविश्लेषण प्रयोगशाला नहीं भेजा गया।
वहीं, एफएसडीए के सीएफएसओ एसके मिश्रा का कहना है कि लखनऊ में दो तिहाई स्कूलों में मिड डे मील सप्लाई का काम अक्षयपात्रा संस्था करती है। नियमित अंतराल पर इनकी निर्माण साइट पर जांच कर गुणवत्ता के साथ सफाई के मानकों को परखा जाता है।
एफएसडीए टीम गड़बड़ी की शिकायत न मिलने तक मिड-डे मील, राशन दुकानों व आंगनबाड़ी केंद्रों में उपयोग होने वाली खाद्य सामग्री की जांच को सिर्फ सर्विलांस सैंपलिंग करती है। खराब गुणवत्ता की शिकायत पर ही नमूना सैंपलिंग कर लैब जांच को भेजा जाता है।
प्रावधानों की अनदेखी
मिड-डे मील योजना में दोपहर का भोजन उपलब्ध कराया जाता है। शहर में एनजीओ और ग्रामीण इलाकों में ग्राम प्रधान व मुख्य शिक्षिका की कमेटी भोजन तैयार कर इसे बंटवाती है। इसके लिए खाद्य सामग्री की उपलब्धता एफसीआई के माध्यम से होती है।
एफएसडीए एक्ट के तहत इसमें इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री की जांच व सैंपलिंग नियमित तौर पर होनी चाहिए। हालांकि, अधिकारी यह कहते हुए बचने की कोशिश करते हैं कि इसकी निगरानी और संचालन का जिम्मा अलग-अलग विभाग संभालते हैं। ऐसे में जब तक खाद्य सामग्री में किसी तरह की गड़बड़ी की शिकायत नहीं आती है, सैंपलिंग नहीं की जाती।