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Lucknow News: मक्खन मलाई से रेवड़ी तक, लखनऊ मंडल के स्वाद का बजेगा डंका

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लखनऊ। नवाबी शहर की मक्खन मलाई, रेवड़ी, उन्नाव का काला जामुन और लखीमपुर खीरी का खीर मोहन अब केवल स्थानीय पहचान तक सीमित नहीं रहेंगे। प्रदेश सरकार की ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूजीन’ (ओडीओसी) योजना के तहत लखनऊ मंडल के पारंपरिक स्वाद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की तैयारी है।
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योजना में लखनऊ मंडल के सभी छह जिलों के विशिष्ट व्यंजनों को शामिल किया गया है। लखनऊ की मक्खन मलाई, रेवड़ी और चाट, सीतापुर का मिर्चा पकौड़ा और पेड़ा, उन्नाव का काला जामुन, हरदोई की आलू-पूरी, लखीमपुर खीरी का खोया पेड़ा व खीर मोहन तथा रायबरेली के मसाला उत्पाद अब सरकार की विशेष प्रोत्साहन सूची में होंगे।
खास बात यह है कि अभी तक इनमें से अधिकांश व्यंजनों की पहचान या तो स्थानीय स्तर तक सीमित थी या फिर आसपास के जिलों तक। लेकिन अब इन व्यंजनों की मानक रेसिपी तैयार की जाएगी, आधुनिक पैकेजिंग विकसित होगी और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़कर इनके लिए नए बाजार तलाशे जाएंगे। फूड फेस्टिवल, पर्यटन आयोजनों और ब्रांडिंग अभियानों के जरिए इन उत्पादों को प्रदेश की नई पहचान के रूप में स्थापित करने की योजना है। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल केवल स्वाद को पहचान नहीं देगी, बल्कि हजारों हलवाइयों, कारीगरों और लघु उद्यमियों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा करेगी।
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लखनऊ मंडल के ‘स्टार स्वाद’
लखनऊ: मक्खन मलाई, रेवड़ी, चाट, आम उत्पाद।

सीतापुर: मक्खन मलाई, समोसा, मिर्चा पकौड़ा, पेड़ा।

उन्नाव: काला जामुन, समोसा, कुशली, त्रिलोक परी।
हरदोई: आलू-पूरी, लड्डू, लाओझड़।

लखीमपुर खीरी: केला, गुड़, खोया-पेड़ा, खीर मोहन, रसगुल्ला।
रायबरेली: मसाला आधारित उत्पाद।

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शासन के निर्देश के बाद मंडल के इन चयनित पारंपरिक व्यंजनों को नई पहचान देने के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। सभी जिलों से संबंधित व्यंजनों से जुड़े कारोबारियों का ब्योरा मांगा गया है। मेला प्रदर्शनियों में प्रतिभाग पर हुए व्यय के सापेक्ष प्रतिभागियों को 75 प्रतिशत तक की प्रतिपूर्ति की जाएगी। सीएम युवा स्वरोजगार योजना समेत अन्य योजनाओं से लाभान्वित कराया जाएगा। 25 प्रतिशत तक का उपादान जाएगा। जल्द ही लखनऊ समेत मंडल के सभी व्यंजनों की पहचान राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर तक हो जाएगी।
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- अभिजीत गौतम, उपायुक्त उद्योग, लखनऊ
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