कथित पुलिसकर्मी के. मोहनदास से बात कराई
डॉ. बीएन सिंह के मुताबिक, छह अप्रैल की दोपहर दो बजे अनजान नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई। फोनकर्ता ने खुद को ब्लूडार्ट कूरिअर कंपनी का कर्मचारी दीपक कुमार श्रीवास्तव बताया। उसने जानकारी दी कि उनके नाम का अवैध पार्सल पकड़ा गया है और पुलिस के अधिकारी बात करेंगे। इसके बाद उसने कॉल कॉन्फ्रेंसिंग पर लेकर कथित पुलिसकर्मी के. मोहनदास से बात कराई।
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के. मोहनदास ने बताया कि जल्द ही पुलिस अधिकारी उनको कॉल कर आगे की बात करेंगे। इसके बाद बीएन सिंह के पास दूसरे नंबर से कॉल आई। उन्हें बताया गया कि उनके आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल कर पार्सल भेजा गया है। पार्सल में अवैध सामान है। आरोपी ने जांच करने और पीड़ित से जांच में सहयोग करने की बात कही।
वीडियो कॉल के जरिये निगरानी रखी
जालसाज ने बीएन सिंह से कहा कि जांच गोपनीय है। जांच पूरी होने तक वह किसी से संपर्क नहीं कर सकते हैं। पूछताछ के नाम पर दो दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। इस दौरान उन पर वीडियो कॉल के जरिये निगरानी रखी और मानसिक दबाव बनाया।
ठग ने कहा कि आपको अपने खातों में जमा रकम भेजनी होगी। जांच के बाद ये रकम लौटा दी जाएगी। पीड़ित ने आरोपी के बताए आरबीएल बैंक के खाते में 95 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद 25 लाख रुपयों की और मांग होने पर उन्हें ठगी का अहसास हुआ।
डिजिटल अरेस्ट से ऐसे बचें
अगर आपके पास अनजान नंबर से काॅल आए तो सावधान हो जाएं। कॉल करने वाला शख्स यह कहता है कि आपके नाम से बुक पार्सल को कस्टम विभाग ने पकड़ा है। केस दर्ज कर कर कार्रवाई की जा रही है...तो तुरंत सतर्क हो जाएं। ये कॉल साइबर ठग की होती है। तत्काल पुलिस से शिकायत करें।
यहां करें शिकायत
यदि आप ठगी का शिकार होते हैं तो साइबर क्राइम थाने, साइबर सेल, लोकल पुलिस स्टेशन, टोल फ्री नंबर 1930 या www.cybercrime.gov.in वेबसाइट के जरिये शिकायत दर्ज करा सकते हैं।