वेबसाइट पर कई सरकारी वेबसाइट का लिंक भी दिया था, ताकि लोग इसे सरकारी वेबसाइट ही समझें। वेबसाइट पर दावा किया जाता था कि ई ग्राम डिजिटल की फ्रेंचाइजी लेकर कम समय में अधिक धन कमाया जा सकता है।
एक फ्रेंचाइजी 3000 से डेढ़ लाख रुपये तक में दे रहे थे। अब तक लगभग 1600 लोग अलग-अलग कीमत अदा कर चुके हैं। वेबसाइट पर नाम न होने से एसटीएफ को सुधांशु तक पहुंचने में दिक्कत आ रही थी।
इस पर एसटीएफ के एक अफसर ने खुद फ्रेंचाइजी के लिए ऑनलाइन अप्लाई किया और उसे मिलने के लिए लखनऊ बुलाया। मंगलवार को जब सुधांशु पैसे लेने पहुंचा तो एसटीएफ ने उसे दबोच लिया। उसने बताया कि वह अब तक 1600 से अधिक लोगों को ठग चुका है।
वह बताता था कि फ्रेंचाइजी लेने के बाद पेमेंट गेटवे, बैंकिंग करेस्पांडेंट, आईएमपीएस, आईआरसीटीसी, बस टिकट मनी ट्रांसफर, मोबाइल डिश टीवी रिचार्ज, लोन एकाउंट, हॉलीडे पैकेज, युटिलिटी पैकेज और बिल पेमेंट की सुविधा मिल जाएगी। इनसे कमाई की जा सकती है।
सुधांशु ने आईसीआईसीआई और इंडसइंड बैंक के दो खातों में 11 करोड़ से अधिक रकम जमा करवाई। टोल फ्री नंबर लेकर और पीआरआई लाइन की सुविधा लेकर कॉल सेंटर भी खोल लिया था, जिस पर ग्राहकों को फंसाता था। इसके अलावा आधार इनेबिल पेमेंट सिस्टम मशीन के नाम पर भी एकाउंट में पैसे जमा कराए।
एसएसपी ने बताया कि सुधांशु को फर्जी सीबीआई अफसर बनकर रेड डालने के आरोप में वर्ष 2013 में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने उसे चार साल की सजा सुनाई थी। अभी वह जमानत पर था। मध्य प्रदेश और वाराणसी में भी फर्जीवाड़े के मामले दर्ज हैं। वहीं इस मामले को लेकर वाराणसी के रोहनियां थाने में केस दर्ज है।