फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नौकरी के नाम पर आन शोध संस्थान ने की लाखों की ठगी, कई लोगों ने संस्थान के खिलाफ दर्ज कराया मुकदमा

विज्ञापन
विज्ञापन
लखनऊ। हजरतगंज इलाके में आन शोध संस्थान नाम से संस्था खोलकर नौकरी के नाम पर सैकड़ों लोगों से लाखों रुपये की वसूली की गई। यही नहीं काम करने के बावजूद लोगों को कई माह से सैलरी तक नहीं दी गई। ठगी का अहसास होने पर पीड़ितों ने सोमवार को हजरतगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
विज्ञापन

हजरतगंज थाना प्रभारी श्याम बाबू शुक्ल के मुताबिक, सभी पीड़ितो की तहरीर पर आरोपी अवनीश तिवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच कार्रवाई की जाएगी। पीड़ितों के मुताबिक, दिसबंर 2019 में आन शोध संस्थान ने प्रदेश भर में जिला समन्वयक और ब्लॉक समन्वयक के पद के लिए नौकरी का विज्ञापन निकाला था। इसमें नौकरी पाने वाले लोगों को प्रतिमाह 45 हजार रुपये देने की बात कही गई थी। सीतापुर व प्रतापगढ़ समेत कई जिलों के लोगों ने नौकरी के अप्लाई किया। सभी लोगों को संस्थान बुलाया गया और नौकरी पाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति से एक-एक लाख रुपये देने को कहा गया। कई लोगों ने तो मना कर दिया। वहीं कई लोगों ने रकम दे दी।
मिर्जापुर के रहने वाले पीड़ित उदय भान सिंह के मुताबिक, रकम देने के बाद उनको प्रतापगढ़ का जिला समन्वयक बनाया गया था। इसमें हेपेटाइटिस-बी के इंजेक्शन लगवाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद कोरोना शुरू हो गया और काम ठप हो गया। साल 2021 में दवाइयां बेचने के लिए कहा गया। तीन माह तक उदयभान व उनकी टीम ने दवाइयां बेचीं। इसके बाद सैलरी के लिए कहा जाता था तो टाल दिया जाता था। उदयभान से उनके नीचे काम करने वाले युवकों सैलरी मांगनी शुरू कर दी। इस पर उदयभान व अन्य युवक लखनऊ आए तो देखा कि यहां दफ्तर बंद है। उसके बाद से किसी का कोई पता नहीं चला। प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक, मुकदमा दर्ज कर जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन

करीब 20 लोग दर्ज करा चुके हैं केस
ठगी के इस मामले में अभी तक करीब लोगों ने मुकदमा दर्ज कराया है। वहीं पीड़ितों का कहना है कि प्रदेशभर में कई लोग ऐसे हैं जिन्हें ठगी की जानकारी ही नहीं है। सभी को सूचित किया जा रहा है। धीरे-धीरे कर ठगी के शिकार पीड़ित पुलिस से संपर्क कर रहे हैं। पीड़ितों का आरोप है कि आरोपी अवनीश तिवारी ने कोरोना का हवाला देते हुए काम रोक दिया था और किसी को भी तीन माह से सैलरी नहीं दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें