महानगर के सेक्टर-बी निवासी अमित कुमार नंदी ने कारोबार में निवेश का झांसा देकर 90 लाख रुपये ठगने का आरोप लगाते हुए कोलकाता के दंपती समेत तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार सिंह का कहना है कि ठगों ने नासा के स्पेस शटल और न्यूक्लियर एनर्जी में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के कारोबार का झांसा देकर अमित को जाल में फंसाया था। उन्होंने एक नई कंपनी शुरू कर अमित को उसका निदेशक बनाते हुए एक रुपया लगाने पर 500 रुपये कमाने का ऑफर दिया।
पीड़ित अमित कुमार नंदी ने बताया कि वर्ष 2006 में उनके बचपन के दोस्त ने राजाजीपुरम के सी ब्लॉक निवासी सुकांता सुब्रत बनर्जी और उसकी पत्नी रक्तिमा बनर्जी तथा अनिरबन बनर्जी से मुलाकात कराई थी।
दंपती पश्चिम बंगाल में कोलकाता के गोपाल लाल ठाकुर रोड के रहने वाले हैं, जबकि अनिरबन कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस पथघर न्यू बैरकपुर में रहता है। तीनों ने सिंडीकेट ऑफ आरएमपीएस कंपनी के कारोबार के बारे में बताया।
कहा कि कंपनी स्पेस शटल और न्यूक्लियर एनर्जी में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की खरीद-फरोख्त का काम करती है। ठगों ने कारोबार से संबंधित अमेरिकन स्पेस एजेंसी नासा के दस्तावेज और कुछ सरकारी कागजात भी दिखाए। सुकांता ने यह भी कहा कि उसकी एक और कंपनी सोल प्राइवेट लिमिटेड है।
उसने स्पेस शटल और न्यूक्लियर एनर्जी के काम के लिए एक और कंपनी खोलने की बात कही। सुकांता ने कहा कि उक्त कंपनी में अपने साथ उसे व एक मित्र कुलदीप देसाई को निदेशक बनाया जाएगा। उसने अमित को कंपनी में एक रुपया लगाने पर 500 रुपये मिलने का ऑफर दिया तो वह तैयार हो गए।
कंपनी शुरू होने के बाद सुकांता ने अमित से रुपया मांगना शुरू कर दिया। नकद व चेक के जरिए अमित ने कई बार में उसे 90 लाख रुपये दे दिए। काफी समय बाद भी उसे लाभांश नही मिला तो पूछताछ शुरू की गई। ठग दंपती और उनका साथी लाभांश के साथ पूरी रकम लौटाने का आश्वास देते रहे।
29 मार्च को ठगों ने रुपया देने की बात कहते हुए अमित को कोलकाता बुलाया। वहां पहुंचने पर रुपया देने के बजाए ठग उससे रुपया मांगने लगे। अमित ने रुपये देने से मना कर दिया जिसके बाद उन्होंने गाली-गलौज व जानमाल की धमकियां दीं।
अंतरराष्ट्रीय कोर्ट से सजा की बात कहते हुए नहीं दिए कंपनी के कागज
अमित ने नासा से संबंधित कागजों की जांच कराने की बात कही तो ठगों ने उसे टोक दिया। सुकांता ने कहा कि अगर नासा के कागजों की जांच कराएंगे तो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अंतरराष्ट्रीय कोर्ट से 21 साल की सजा हो सकती है।
इस पर अमित ने कागजों की सत्यता परखने का तरीका पूछा। ठग सुकांता ने खुद को उक्त कंपनी का चीफ कोऑर्डिनेटर बताते हुए सारी पड़ताल के बाद ही कारोबार शुरू करने की बात कही। उसने यह भी बताया कि कंपनी के भारत में अधिकृत अधिकारी मुंबई निवासी जितेंद्र कोठारी हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय के पत्र और ई-मेल दिखाकर वसूलते रहे रकम
अमित ने बताया कि ठगों ने उसे प्रधानमंत्री कार्यालय के पत्र और ई-मेल दिखाकर रुपया वसूला। वह जब भी उनसे अपना रुपया वापस मांगने जाता, वह कभी प्रधानमंत्री कार्यालय तो कभी भारतीय रिजर्व बैंक और कभी एक्सिस बैंक के पत्र व ई-मेल दिखाकर जल्द रुपया आने की जानकारी देता। अमित उसकी बातों के जाल में फंस जाते तो वह उन्हें रुपया लौटाने के बजाए उनसे रुपये मांग लेता था।