बाराबंकी के मेयो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में कॉलेज के कर्मचारियों और दलालों की साठगांठ से लाखों के वारे-न्यारे हो रहे हैं।
बदायूं के एक व्यक्ति ने मोबाइल से वीडियो क्लिप बनाकर इस गोरखधंधे का भांडा फोड़ा है। वे अपने बेटे को एमबीबीएस में दाखिला दिलाना चाहते थे। इसके लिए उनसे 16.50 लाख रुपये ठग लिये गए।
उन्होंने शनिवार को बदायूं के सिविल लाइंस थाने में जालसाजी का मुकदमा दर्ज कराया है। इससे पहले वे डीजीपी से इसकी शिकायत कर चुके हैं। एक रिटायर फौजी ने भी खुद से 11 लाख ठगे जाने की पुलिस से शिकायत की है।
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बदायूं के उघैती गांव के राजीव पाठक ने बताया कि उनके बेटे प्रशांत पाठक व भतीजे निशांत पाठक की दोस्ती कानपुर में मेडिकल कोचिंग के दौरान बीटेक छात्र मधुसूदन उर्फ लाले से हुई थी।
मधुसूदन ने प्रशांत को मेयो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस में एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने का भरोसा दिलाकर पहले कानपुर के आशीष से फिर 29 जुलाई को मनोज उर्फ अमित नामक युवक से परिचय कराया।
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अमित ने कहा कि वह मेयो कॉलेज के एडमिशन सेल में कार्यरत रमेश मिश्रा के लिए काम करता है। अमित ने प्रशांत व उसके पिता को कॉलेज ले जाकर रमेश मिश्रा से मुलाकात कराई। रमेश ने दोनों को कॉलेज चेयरमैन डॉ केएन सिंह से मिलवाया।
उन्होंने दाखिले के लिए रमेश और अमित को जिम्मेदार बताकर उन्हीं से संपर्क करने को कहा। अब राजीव को अपने बेटे के दाखिले के रास्ते साफ नजर आने लगे।
यूं चला ठगी का खेल
अमित ने 7 अगस्त को राजीव को एसएमएस भेजकर अगले दिन कॉलेज पहुंचने को कहा। साथ ही फोन पर कहा कि 16.50 लाख रुपये के तीन पैकेट बनाने हैं। एक में 10.50 लाख और दो पैकेट तीन-तीन लाख के होंगे।
बेटे व भतीजे के साथ नोटों के पैकेट से भरा बैग लेकर राजीव 8 अगस्त की दोपहर कॉलेज पहुंचे। अमित, मधुसूदन और आशीष उन्हें कॉलेज के प्रथम तल स्थित एडमिशन सेल ले गए।
अमित ने उन्हें एक फार्म लाकर दिया और नोटों से भरा बैग लेकर रमेश मिश्रा के केबिन में चला गया। थोड़ी देर बाद खाली बैग लेकर लौटा।
प्रशांत से फार्म भरवाया और हाईस्कूल व इंटर के मूल प्रमाणपत्र संलग्न कराकर कब्जे में ले लिया। उसने राजीव को एक स्लिप थमाई। उस पर लिखे अंकों को एडमिशन कोड बताते हुए 9 सितंबर को कॉलेज आकर फीस के दस लाख का ड्राफ्ट जमा करने को कहा।
फीस के अतिरिक्त आठ लाख रुपये
इसके बाद राजीव नेकॉलेज की वेबसाइट पर उपलब्ध नंबर पर संपर्क किया। रमेश मिश्रा ने अमित से बात करने को कहा। इस बीच अमित ने खुद राजीव को फोन करके कहा कि कॉलेज में एमसीआई की टीम आई है। वहां फोन न करें। बाद में जब राजीव और प्रशांत कॉलेज पहुंचे तो उन्हें पहचानने से इंकार कर दिया गया।
लेनदेन की वीडियो क्लिप सौंपी
राजीव का कहना है कि प्रशांत के साथ उनका भतीजा निशांत भी कॉलेज गया था। कुछ दूरी पर बैठे निशांत ने एडमिशन सेल में हुई डील की अपने मोबाइल में क्लिप बना ली थी।
किस तरह अमित ने नोटों से भरा बैग चेक किया। तीन लाख का एक पैकेट अपने साथी को थमाया और बैग लेकर रमेश मिश्रा के चैंबर में गया। इसके साथ प्रशांत से एडमिशन फार्म भराने की रिकॉर्डिंग है। राजीव ने तीन बीघा जमीन, एक प्लॉट और कुछ गहने बेचकर फीस जुटाई थी।
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