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यूपी में फर्जीवाड़ा: पंजीयन संख्या एक,डॉक्टर के नाम अलग- अलग; फर्जी प्रमाण पत्रों पर किया जा रह है रजिस्ट्रेशन

Sun, 31 Aug 2025 09:30 AM IST
रोहित मिश्र चन्द्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ

सार

Fake doctors in UP: पूरे प्रदेश में डॉक्टरों की डिग्री पंजीयन से लेकर अस्पताल संचालन के पंजीयन में बड़े पैमाने पर खेल चल रहा है। इसमें किसी न किसी रूप में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की मिलीभगत है। 
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यूपी में डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन में फर्जीवाड़ा। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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 उत्तर प्रदेश मेडिकल कौंसिल ने सूचना के अधिकार के तहत 24 जुलाई 2025 को जानकारी दी है कि पंजीयन संख्या 98616 पर डा. यूसुफ पुत्र मीरहसन का नाम दर्ज है। जबकि गौतम बुद्ध नगर के जेवर टप्पल रोड स्थित निजी अस्पताल ने सीएमओ कार्यालय में दिए गए दस्तावेज में डा. नीतेश कुमार का पंजीयन संख्या 98616 लिखा है। सीएमओ कार्यलाय ने इसी नंबर पर अस्पताल का पंजीयन भी पांच साल के लिए कर दिया है। यह केस तो उदाहरण मात्र है।

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पूरे प्रदेश में डॉक्टरों की डिग्री पंजीयन से लेकर अस्पताल संचालन के पंजीयन में बड़े पैमाने पर खेल चल रहा है। इसमें किसी न किसी रूप में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की मिलीभगत है। यह खेल चित्रकूट और सिद्धार्थनगर जैसे छोटे जिलों में ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से सटे जिलों में धड़ल्ले से चल रहा है। अस्पतालों के पंजीयन के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय (सीएमओ) में डॉक्टर के नाम के साथ ही उसके सभी दस्तावेज देने होते हैं। इसमें उत्तर प्रदेश मेडिकल कौंसिल का प्रमाण पत्र भी अनिवार्य है। तमाम अस्पताल दस्तावेजों में हेरफेर करके पंजीयन करा रहे हैं। इसमें किसी न किसी रूप में सीएमओ कार्यालय की भूमिका संदिग्ध है। स्वास्थ्य महानिदेशालय में भी इस तरह की शिकायतें लगातार आ रही हैं। इन शिकायतों पर सीएमओ कार्यालय से रिपोर्ट मांगी जाती है। ऐसे में आनन- फानन में अस्पताल का पंजीयन निरस्त करके कार्रवाई करने की रिपोर्ट भेज दी जाती है।

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फर्जी डिग्री से ले रहे हैं आयुष्मान का लाभ

निजी अस्पताल सीएमओ कार्यालय से पंजीयन पूरा करते ही आयुष्मान भारत योजना सहित बीमा से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के दायरे में आ जाते हैं। यही वजह है कि सीएमओ कार्यालय पंजीयन से लेकर बीमा योजना में संबद्धता दिलाने तक का जिम्मा लेता है। आयुष्मान भारत योजना में एक बार संबद्धता मिल जाने के बाद आराम से पूरा खेल चलता रहता है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
बिना मेडिकल कौंसिल में पंजीयन कराए कोई भी डॉक्टर मरीज नहीं देख सकता है। इसी तरह अस्पताल का भी सीएमओ कार्यालय से पंजीयन होता है। अस्पताल को मौजूद सुविधाएं, डॉक्टर के नाम और उनसे जुड़े सभी दस्तावेज जमा करने होते हैं। जब भी फर्जी दस्तावेज से जुड़ी शिकायतें आती हैं तो उसकी जांच कराई जाती है।-डा. रतनपाल सिंह सुमन, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य।

सूचना के अधिकार के तहत दी गई जानकारी
एक ही पंजीयन संख्या पर दो डॉक्टरों का नाम होना साबित करता है कि कहीं न कहीं गड़बड़ी हुई है। सूचना के अधिकार के तहत सही जानकारी दी गई है। दूसरे प्रमाण पत्र में संबंधित पंजीयन संख्या और डॉक्टर का नाम किन परिस्थितियों में दर्ज है, यह जांच का विषय है। क्योंकि वह मामला मेरे कार्यकाल का नहीं है।-डा. अनुराग श्रीवास्तव, सचिव यूपी मेडिकल कौंसिल।
 
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