तनीषा अवस्थी ने इमिलिहा स्थित एमसीडी इंटर कॉलेज से इंटर का फॉर्म भरा था। मगर, स्कूल की मान्यता हाईस्कूल तक ही थी। इसलिए इंटर का फॉर्म दूसरे कॉलेज से भरवाए जाते थे। अंत समय तक छात्रा एडमिट कार्ड के लिए टरकाते रहे, लेकिन कार्ड नहीं मिला, जिससे वह परीक्षा नहीं दे पाई।
केस-2
शीलू शुक्ला ने आलमबाग स्थित आदर्श भारती इंटर कॉलेज में इंटर पीसीएम में प्रवेश लिया। दो वर्ष तक रेगुलर पढ़ाई की। मगर, जब उसका एडमिट कार्ड नहीं आया तो जानकारी करने पर पता चला कि कॉलेज की मान्यता केवल हाईस्कूल तक है। इंटर का फॉर्म भराया ही नहीं गया और उसका साल बर्बाद हो गया।
राजधानी में यूपी बोर्ड परीक्षा का फॉर्म भरवाने व पास कराने के नाम पर फर्जीवाड़े का जमकर खेल होता है। हर साल हजारों स्टूडेंट्स इस फर्जीवाड़े का शिकार होते हैं और उनका साल बर्बाद हो जाता है। खास बात यह है कि ऐसी ढेरों शिकायतें हर साल सामने आती हैं, लेकिन विभाग इन पर कोई कार्रवाई नहीं करता, जिससे इनके हौसले बुलंद हैं।
कई कोचिंग संस्थान और अमान्य स्कूल बोर्ड परीक्षा फॉर्म भरवाने और नकल का ठेका उठाने का गोरखधंधा धड़ल्ले से चला रहे हैं। यह खेल वित्तविहीन स्कूलों के साथ मिलकर खेला जाता है। इसके लिए छात्रों से मोटी रकम वसूली जाती है। हालत यह है कि महज बोर्ड फॉर्म भरवाने के नाम पर 5 से 10 हजार रुपये ले लिए जाते हैं।