एकेटीयू के 120 करोड़ रुपये पार करने के बाद आरोपियों ने जिस एसयूवी को खरीदा था उसको हैदराबाद भेजा था। एसयूवी हैदराबाद कौन ले गया और किसके पास भेजा गया। इस बारे में पुलिस तफ्तीश कर रही है। अब तक की जांच में एक बात लगभग साफ हो गई कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ है। पुलिस की पांच टीमें तफ्तीश में जुटी हैं। एक टीम हिमाचल में आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक अनुराग श्रीवास्तव और उसका साथी कपिल अलग-अलग राज्य में है। हिमाचल और गुजरात में होने की आशंका है। इसलिए इन दोनों राज्यों में टीमें डेरा डाले हैं। इसके अलावा यूपी, महाराष्ट्र और दिल्ली में भी एक एक टीम लगी है। दोनों की गिरफ्तारी के बाद ठगी के पूरे राज खुलेंगे। जानकारी के मुताबिक गिरोह में आठ से दस लोग हैं। मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस बैंक से संबंधित लोगों की भूमिका की गहनता से तफ्तीश करेगी। पूरा गिरोह पकड़े जाने के बाद पुलिस इन सभी पर गैंगस्टर की कार्रवाई करेगी।
महाराष्ट्र भी ट्रांसफर की गई रकम
जो रकम पार की गई थी उसमें से तमाम रकम कई अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की गई थी। इसमें महाराष्ट्र का भी एक खाता है। इसमें 50 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। संबंधित बैंक से खाते का विवरण जुटा लिया गया है। पुलिस आरोपियों से खाताधारक का कनेक्शन पता कर रही है।
बचे एक करोड़ भी खाते में आए
बैंक के बड़े अधिकारियों ने ठगी के खेल को पकड़ा था। खातों की रकम फ्रीज कराई थी। इसमें पुलिस की भी भूमिका रही थी। यही वजह है कि दो दिन पहले ही 119 करोड़ रुपये एकेटीयू के खाते में ये रकम वापस आ गई थी। बची एक करोड़ की रकम भी बृहस्पतिवार को विवि के खाते वापस आ गई। विवि के फाइनेंस ऑफिसर सुशील कुमार गुप्ता ने बताया कि विवि की पूरी रकम सुरक्षित वापस आ गई है।