इसके बाद एक भी किस्त न जमा करने पर डॉ. मोहन को नोटिस भेजा, कुछ दिन बाद जालसाज ने बैंक की बीकेटी शाखा से पांच लाख का लोन करा लिया। बैंक प्रबंधक ने दोनों शाखाओं में जमा दस्तावेजों की जांच कराई तो फर्जीवाड़े सामने आया।
डॉ. मोहन ने बैंक को चूना लगाने के लिए दो फर्जी पैन कार्ड बनवाए थे। वहीं, गोमतीनगर शाखा से भी लोन के लिए तीसरा पैनकार्ड तैयार कर रकम हड़पने की फिराक में था।