अंबेडकरनगर। संपत्ति के विवाद में वर्ष 2016 में हुई हत्या के मामले में न्यायालय ने मृतक की अनुज वधू, उसके पिता समेत चार अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड प्रत्येक पर लगाया है।
अकबरपुर के शहजादपुर मोहल्ला छावनिया निवासी घनश्याम सोनी ने पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि 17 अगस्त 2016 की सुबह 10:00 बजे उनके पिता शीतला प्रसाद दवा लेने के लिए लखनऊ जाने की बात कह कर घर से निकले थे। शाम करीब 5:00 बजे पिता से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया तो उन्होंने भिटरिया पहुंचने की जानकारी दी थी। शाम 6:30 बजे के बाद उनका मोबाइल बंद हो गया था। इसके बाद तलाश शुरू की लेकिन कोई सुराग नहीं लग पाया था। 18 अगस्त 2016 को शाम 5:00 बजे पुलिस से अज्ञात शव मिलने की जानकारी हुई। इसके बाद पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर शव की पहचान अपने पिता शीतला प्रसाद के रूप में की थी। शव टांडा क्षेत्र में मिलने की वजह से वहीं पर घनश्याम सोनी की तहरीर पर पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। विवेचना के बाद सूरज वर्मा निवासी मुंडेरिया का पुरवा इब्राहिमपुर, राम मगन वर्मा निवासी करमुलहा अकबरपुर, घनश्याम सोनी निवासी मुबारकपुर टांडा और दीपमाला सोनी के विरुद्ध साजिशन हत्या का आरोप पत्र सीजेएम कोर्ट में दाखिल किया गया था। घनश्याम वर्मा ने पुलिस को बताया था कि 2 मई 2011 को उनके दादा सत्यनारायण और दादी चमेली देवी की मौजूदगी में उनके पिता व चाचा दुर्गा प्रसाद, राजेंद्र, संजय, अजय और दीपक के बीच राजी नामा हुआ था। इसके अनुसार शहजादपुर में मकान नंबर 30 चाचा राजेंद्र कुमार को दिया गया था। इसके बाद इस मकान में राजेंद्र परिवार के साथ रहने लगे थे। यह मकान शीतला प्रसाद के नाम था। चाची दीपमाला चाचा राजेंद्र और उनके ससुर घनश्याम सोनी शीतला प्रसाद पर पर मकान की रजिस्ट्री करने के लिए दबाव डालने लगे थे। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उन्होंने बैनामा करने से इनकार कर दिया था। पुलिस विवेचना में सामने आया था कि मृतक की अनुज बहू दीपमाला ने अपने पिता घनश्याम सोनी के साथ मिलकर सूरज को एक लाख रुपए में हत्या करने की सुपारी दी थी। इसी के बाद वारदात को अंजाम दिया गया था। मंगलवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम परविंद कुमार ने चारों अभियुक्तों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा के साथ 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड न अदा करने पर दो-दो माह का अतिरिक्त साधारण का कारावास भुगतना होगा।