डेंगू से डरे-सहमे राजधानी के लोगों को अब स्वास्थ्य विभाग और साफ-सफाई के लिए जिम्मेदार लोगों की निष्क्रियता बर्दाश्त नहीं हो रही है। रविवार को भी डेंगू से चार लोगों की जान चली गई।
डेंगू पीड़ित इंदिरानगर निवासी सुमन (40) की मौत पर परिवारीजनों व स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। घरवालों ने लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए करीब ढाई घंटे तक हंगामा किया।
वहीं स्थानीय लोगों के समर्थन में सड़क पर उतरे संगठन एडवा के सदस्यों ने स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम पर लापरवाही का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लोग डेंगू से मर रहे हैं।
सारा शहर दहशत में है, लेकिन न तो साफ-सफाई पर ध्यान दिया जा रहा है और अस्पतालों में बेड व जांच के लिए मारामारी मची है। सड़क जाम कर विरोध की सूचना पर एसीएम और पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत कराया।
रविवार को कुल 39 नए मरीजों में वायरस की पुष्टि हुई। कुल 39 नए मरीजों के साथ कार्ड टेस्ट से डेंगू पीड़ितों का आंकड़ा 1437 हो गया है। सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव ने बताया कि रविवार को लखनऊ के 18 नए मरीजों में एलाइजा जांच से डेंगू की पुष्टि हुई जिसके बाद एलाइजा से डेंगू पीड़ित मरीजों का आंकड़ा 347 पहुंच गया है।
इंदिरानगर के बस्तौली मोहल्ले में रहने वाली दीपा उर्फ सुमन के पति सुदामा व बेटे सनी ने बताया कि चार दिन पहले तेज बुखार होने पर उसे लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया था।जांच में डेंगू की रिपोर्ट पॉजीटिव आई थी। कुछ दिन तक इलाज चला, फिर उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। सुमन की तबीयत शनिवार को अचानक बिगड़ गई।
सुदामा ने बताया कि लोहिया अस्पताल ले गए। वहां सिर्फ प्राथमिक उपचार मिला। काफी देर तक इमरजेंसी में रहे, लेकिन बेड नहीं मिला। इसके बाद उसे लेकर घर चले आए। शाम को सुमन की हालत बिगड़ने लगी और घरवाले कुछ समझ पाते कि इससे पहले उसकी मौत हो गई।
परिवारीजनों का आरोप है कि लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों ने भर्ती कर इलाज दिया होता तो सुमन की जान बच जाती। सुमन की मौत से नाराज स्थानीय लोगों और एडवा सदस्य सीमा राणा, स्मिता पांडे, रुपरानी और सुशीला संग करीब 200 लोगों ने इंदिरानगर-बी-ब्लॉक चौराहे पर रविवार को मानव श्रृंखला बनाकर हंगामा किया।