एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही ईडी की पड़ताल में एनजीओ द्वारा की गई मनी लॉन्ड्रिंग की रकम लगातार बढ़ती जा रही है।
ऐसी रकम का आंकड़ा अब तक चार सौ करोड़ पार कर चुका है। इसके अभी और अधिक बढ़ने का अंदेशा है। ईडी इसकी तलाश में जुटी है।
ईडी को मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत तो मिलते जा रहे हैं लेकिन जिन संस्थाओं से इसे किया गया उनके संस्थापकों के बारे में अधिक जानकारी नहीं मिल रही है।
कारण यह कि मनी लॉन्ड्रिंग करने वाले एनजीओ संचालकों ने विभिन्न बैंकों में जो खाते खोले, उसमें उन्होंने अपने नाम-पते गलत दर्ज कराए हैं।
इसी तरह जिन पतों पर एनजीओ के कार्यालय दिखाए गए हैं, वे सभी फर्जी निकल रहे हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग करने में जिस एनजीओ के संचालक की अहम भूमिका सामने आ रही है वह लखनऊ का वही व्यक्ति है जो पूर्व मंत्री के करीबी आईएएस अधिकारी का भरोसेमंद था।
बीएसएनएल की नौकरी छोड़ कर एनजीओ चलाने के धंधे में उतरे इस व्यक्ति का एनजीओ के दस्तावेजों में जो पता दर्ज था, उसकी ईडी तस्दीक करती रही पर सफलता नहीं मिली।
सूत्रों के अनुसार इस संस्था का एक पता लखनऊ के मोतीनगर का भी दर्शाया गया था। यहां ईडी ने दो दिन तक पड़ताल की लेकिन पता फर्जी निकला।
एनजीओ संचालकों के सही पते की जानकारी के लिए ईडी ने जब उन बैंक शाखाओं से संपर्क किया जहां इनके खाते थे, तो वहां भी दर्ज जानकारी गलत निकली।
इस खास एनजीओ संचालक ने अपने एक बैंक खाते में फोटो तो खुद की लगाई है पर नाम- पता गलत दिखाया है।
ईडी इन संचालकों के यहां नोटिस लगाना चाहती है ताकि उन्हें औपचारिक तौर पर पूछताछ के लिए बुलाया जा सके लेकिन सही पता न मिलने से दिक्कत हो रही है।
ईडी इन एनजीओ के नाम से दर्ज संपत्ति की भी जानकारी करने की कोशिश कर रही है। यह जानकारी मिलने के बाद वह इन संपत्तियों को सीज करेगी।
ईडी पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा, पूर्व विधायक आरपी जायसवाल व उनसे जुड़े कुछ लोगों की संपत्ति सीज कर चुकी है। अब कुशवाहा की पत्नी शिवकन्या की संपत्ति सीज करने की तैयारी है।