लखनऊ। एसटीएफ ने लग्जरी कारों की एजेंसियों का खुद को मालिक बताकर कर्मचारियों से करोड़ों रुपये बैंक खाते में ट्रांसफर कराकर हड़पने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के चार सदस्यों को दबोचा है। सभी बिहार के गोपालगंज व सीवान के रहने वाले हैं। गिरोह ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली व बिहार के कई एजेंसियों के करोड़ाें रुपये अपने फर्जी दस्तावेज पर खोले गए खातों में मंगाकर साफ कर दिए। गिरोह एजेंसी के कर्मचारियों से कई चेक व फोटो मंगवाकर बैंक की सांठगांठ से रुपये ट्रांसफर करते थे। एसटीएफ के मुताबिक, जांच में सामने आया कि बैंक अधिकारियों की भूमिका खंगाली जा रही है।
एसटीएफ के प्रभारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों में बिहार के सिवान निवासी रानू कुमार सिंह, गोपालगंज निवासी राहुल सिंह, निहाल सिंह और पकंज कुमार शाह शामिल हैं। गिरोह के सरगना रानू ने लखनऊ की मर्सिडीज वेंज कार की एजेंसी लेने वाले एसआरएम स्मार्ट हुप्स प्रा. लि., होंडा कार की दिल्ली स्थित एजेन्सी सुगोई मोटर्स प्रा. लि. का चीफ फाइनेंस अधिकारी बनकर ठगी की। इसी तरह उसने अन्य जिलों की एजेंसी से भी जालसाजी की। विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक, यह गिरोह किसी बड़ी एजेंसी का मालिक बनकर वहां के सीए को व्हाट्सएप कॉल या मेसेज करते थे। वह यह कहते थे कि दिनभर की आरटीजीएस के जरिये भेजी गई रकम का ब्योरा भेजो। साथ ही दो चेक की फोटो भी मंगा लेते थे। इसके बाद बैंक अधिकारियों को यह चेक भेजकर अपने द्वारा फर्जी दस्तावेजों से विभिन्न जिलों में खोले गये खातों में लाखों रुपये स्थानांतरित करा लेते थे।
14 फर्जी बैंक खातों का किया गया प्रयोग
एसटीएफ अधिकारी के मुताबिक, इस गिरोह ने एक साल में तीन करोड़ रुपये फर्जीवाड़ा कर हड़प लिए। इसके लिये फर्जी दस्तावेजों से खोले गए 14 बैंक खातों का प्रयोग किया गया। इस संबंध में एसआरएम मोटर्स के एकाउंटेंट उत्तम कुमार ने बीबीडी कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें आरोप था कि उनकी कंपनी से दो बार में 18 लाख 40 हजार रुपये और 58 लाख रुपये की ठगी की गई। एसटीएफ ने गिरोह के चार लोगों की गिरफ्तारी के बाद विभिन्न बैंक खातों में जमा 25 लाख 63 हजार रुपये सीज करा दिए हैं। उत्तम कुमार ने शिकायत की थी कि उनके पास पीएनबी के मुख्य प्रबंधक की कॉल आई थी जिसमें कहा कि एजेंसी के मालिक ने 18 लाख 40 हजार रुपये का आरटीजीएस कराया है। इसकी चेक व्हाटसएप के जरिये भेजी थी। अब चेक भेजिये। जब उत्तम कुमार ने कंपनी के मालिक से बात की तो असलियत सामने आई। इसके बाद ही एसटीएफ के एसआई पंकज सिंह व मनोज सिंह ने पड़ताल शुरू की थी।
गिरोह का सरगना लूट के आरोप में जा चुका है जेल
प्रभारी एसएसपी विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक सरगना रानू सिंह सितंबर 2020 में सिवान से रुपये व बाइक लूटने में राहुल सिंह के साथ जेल गया था। उस पर एक व्यक्ति को गोली मारने का भी आरोप था। इसमें भी पुलिस ने दबोचा था। जेल से छूटने के बाद नवंबर 2021 में रानू की मुलाकात गोपालगंज निवासी सुमित शर्मा से हुई थी। सुमित ने रानू को बताया कि उनका काम एटीएम और चेक के जरिये बैंक खातों से रुपये निकालने का था। कमीशन के तौर पर इन्हें काफी रकम दी जाती थी। ये लोग ही फर्जी दस्तावेजों से खाता खुलवाने में मदद करते थे। ये लोग अलग-अलग जिलों में गूगल पे व अन्य माध्यम से ट्रांसफर की कई रकम निकालते थे। पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों की कुंडली भी खंगाल रही है। वहीं इस तरह की कार व बाइक एजेंसियों में हुए फर्जीवाड़े से जुड़े बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है। एसटीएफ के मुताबिक इस गिरोह का नेटवर्क बैंक के अंदर भी मजबूत है। इसी कारण वह फर्जी नाम व पते पर खाते खुलवाने में सफल हो जाते हैं।