सेवा में रहकर हुक्मरानों के मन मुताबिक करने की हद तक जाने और बाद में सरकार से उसकी कीमत पुनर्नियुक्ति व सेवा विस्तार के रूप में पाने वाले अफसरों की विदाई की तैयारी हो रही है। ऐसे करीब 76 अफसरों के नाम सामने आए हैं।
पिछले कुछ वर्षों में यह चलन देखने में आया है कि सत्ता में आने वाले नेता अपने हिसाब से काम करने वाले कुछ अफसरों की तलाश करते हैं। ये अफसर सरकार का मूड देखकर काम करने में माहिर माने जाते हैं।
इन्हें रिटायरमेंट के समय वाले पद की जिम्मेदारी विशेष कार्याधिकारी, सचिव, विशेष सचिव आदि रूप में देकर उपकृत किया जाता रहा है। पिछली सपा सरकार ने तो कई विभागों का जिम्मा ही ऐसे अफसरों के हवाले कर दिया था।
नगर विकास व अल्पसंख्यक कल्याण महकमे में लंबे समय से पुनर्नियुक्ति प्राप्त अधिकारी सचिव जैसी जिम्मेदारी निभा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यालय में ऐसे कई अधिकारी तैनात थे।
सरकार जाने के साथ ही खत्म हो जाती है भूमिका
वे या तो सत्ता जाने से पहले कहीं समायोजित कर दिए गए या सरकार जाने के साथ ही उनकी भूमिका खत्म हो गई। इसके अलावा मुख्य सचिव कार्यालय, नागरिक उड्डयन, वित्त, गोपन, राज्य निर्वाचन आयोग जैसे कई विभागों में पुनर्नियुक्ति प्राप्त अधिकारियों की तैनाती है।
कई अधिकारी तो कई-कई बार से पुनर्नियुक्ति पाते जा रहे हैं। इनकी वजह से सेवा में कार्यरत कर्मियों को नई जिम्मेदारी निभाने का अवसर नहीं मिल पाता है और उनमें कुंठा रहती है।
गौरतलब यह भी है कि जिस तरह उच्च स्तर पर शासन में अवकाश प्राप्त बड़े अफसरों को पुनर्नियुक्ति की रेवड़ी बांटी गई, उसी तरह सचिवालय के विभिन्न अनुभागों व उसके बाहर भी कई अधिकारियों को उपकृत किया गया।
मुख्यमंत्री महंत आदित्यनाथ योगी ने ऐसे अफसरों की सूची तलब कर ली है। सूत्रों ने बताया कि पिछली सरकार के कृपापात्र ऐसे 76 अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। अब इनकी सेवा पर मुख्यमंत्री को अंतिम फैसला करना है।
कई महकमों में विशेषज्ञता का लाभ
कुछ विभाग ऐसे हैं जहां अवकाश प्राप्त अधिकारियों की विशेषज्ञता का लाभ लिया जाता है। ऐसे अफसर न सिर्फ पिछली सरकार में ,बल्कि उसके पहले से पुनर्नियुक्ति पाते रहे हैं।
मसलन, विधायी विभाग में विधीक्षण अधिकारी हरिशंकर त्रिपाठी अरसा पहले रिटायर हो चुके हैं। विधायी प्रस्तावों के गहराई से परीक्षण (विधीक्षित) की उनकी विशेषज्ञता की हर कोई दाद देता है। बिना उन्हें दिखाए कोई प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ाया जाता।
इसी तरह गोपन में विशेष सचिव कृष्ण गोपाल, वेतन आयोग में सचिव अजय अग्रवाल और बजट सलाहकार लहरी यादव की भूमिका है। ये अपने-अपने विषय के विशेषज्ञ माने जाते हैं। देखना होगा सरकार इनको लेकर क्या फैसला करती है।
..पर ज्यादातर पदों पर नहीं होती जरूरत
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि ज्यादातर पद ऐसे हैं जिन पर किसी सेवानिवृत्त अधिकारी की आवश्यकता नहीं है। कोई भी अधिकारी वहां आकर कार्य आगे बढ़ा सकता है। नगर विकास, नागरिक उड्डयन, वाणिज्य कर, चिकित्सा शिक्षा, मुख्य सचिव के विशेष कार्याधिकारी सहित ज्यादातर पद इसी श्रेणी में आते हैं।
और भी अधिकारी छोड़ सकते हैं पद
प्रदेश सरकार के प्रवक्ता की ओर से पुनर्नियुक्ति वाले सभी पदों की समीक्षा का एलान किए जाने के बाद पॉवर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक एपी मिश्र ने इस्तीफा देकर पुनर्नियुक्ति छोड़ने की पहल कर दी है। माना जा रहा है कि दूसरे अधिकारी भी नई सरकार की मंशा समझकर पद छोड़ने की पेशकश कर सकते हैं। हालांकि कुछ अधिकारियों को लेकर ऐसी उम्मीद नहीं की जा रही।
पुनर्नियुक्ति वाले प्रमुख अधिकारी
एसपी सिंह, सचिव, नगर विकास
एसएन श्रीवास्तव, विशेष कार्याधिकारी, मुख्यमंत्री
आरडी पालीवाल, विशेष कार्याधिकारी, मुख्यमंत्री
एसके रघुवंशी, सचिव, नागरिक उड्डयन
मुकेश मित्तल, सचिव, वित्त
अजय अग्रवाल, सचिव, वित्त वेतन आयोग
हरिशंकर त्रिपाठी, विधायी विभाग
लहरी यादव, विशेष सचिव, वित्त
कृष्ण गोपाल, विशेष सचिव, गोपन
मणि प्रसाद मिश्र, सचिव, गृह
उमाशंकर सिंह, ओएसडी, नगर विकास
श्रीचंद द्विवेदी, ओएसडी, वाणिज्य कर विभाग
डॉ. वीएन त्रिपाठी, महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा