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सचिवालय अपर निजी सचिव संघ के पूर्व अध्यक्ष अमर सिंह बर्खास्त, सीएम पर की थी टिप्पणी

Tue, 08 Sep 2020 05:44 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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अमर सिंह - फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व डिप्टी सीएम डा. दिनेश शर्मा के खिलाफ जातिवादी टिप्पणी करने के आरोपी सचिवालय अपर निजी सचिव संघ के पूर्व अध्यक्ष अमर सिंह -द्वितीय को बर्खास्त कर दिया है।
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प्रकरण जुलाई, 2018 का है।

अपर निजी सचिव संघ के पूर्व अध्यक्ष अमर ने अपने सीयूजी मोबाइल नंबर से दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में शिक्षक भर्ती का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के खिलाफ जातिवादी टिप्पणी कर अपर निजी सचिव संवर्ग के व्हाटसेप ग्रुप पर जारी किया था। प्रकरण संज्ञान में आने पर शासन ने अमर के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की और जांच बैठा दी।

जांच के दौरान अमर ने मैसेज केत्रुटिवश फारवर्ड होना स्वीकार किया। लेकिन, जांच अधिकारी ने निष्कर्ष दिया कि अमर ने मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री के खिलाफ टिप्पणी त्रुटिवश नहीं, बल्कि अपर निजी सचिव संघ का अध्यक्ष होने के नाते व्हाटसेप ग्रुप के सदस्यों को संदेश से अवगत कराकर सदस्यों में ख्याति बढ़ाने के मद्देनजर की थी। आरोपी को जब पता चला कि उसके कृत्य को गंभीरता से लेकर कार्रवाई शुरू की जा रही है तो उसने इससे बचने के लिए सोच-समझकर त्रुटिवश फारवर्ड होने की बात कही।
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जांच अधिकारी विशेष सचिव सतर्कता अनिल कुमार सिंह ने अमर के कृत्य को घोर आपत्तिजनक, अनुशासनहीनता, कदाचार और स्वेच्छारिता करार देने के साथ उसकी सत्यनिष्ठा को संदिग्ध करार दिया। उन्होंने अमर को सेवा से पदच्युत (जो भविष्य में नियोजन से निरर्हित न करता हो) करने का दंड देने की संस्तुति की। शासन ने अमर की बर्खास्तगी का निर्णय करते हुए राज्य लोक सेवा आयोग से सहमति मांगी थी। आयोग ने भी शासन के निर्णय पर सहमति दे दी। अपर मुख्य सचिव सचिवालय प्रशासन हेमंत राव ने अमर को बर्खास्त करने संबंधी आदेश जारी कर दिया है।

तीन जांच अधिकारी बदले
शासन ने सबसे पहले इस मामले की जांच तत्कालीन विशेष सचिव नागरिक उड्डयन सूर्यपाल गंगवार को सौंपी थी। गंगवार ने अन्य महत्वपूर्ण शासकीय कार्यों में व्यस्तता का हवाला देते हुए जांच में असमर्थता जताई। इसके बाद इस प्रकरण की जांच तत्कालीन विशेष सचिव गृह अभिषेक प्रकाश को सौंपा गया। अभिषेक ने आरोपी कर्मी को आरोप पत्र दिया ही था कि उनका तबादला हो गया। इसके बाद विशेष सचिव सतर्कता अनिल कुमार सिंह को इसकी जांच सौंपी गई।

विधानसभा में बर्खास्त न करने की हुई थी मांग
अपर निजी सचिव अमर सिंह पटेल को बर्खास्त न करने का मामला फरवरी में विधानमंडल सत्र के दौरान उठाया गया था। नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी व बसपा विधायक सुषमा पटेल ने बर्खास्तगी को ज्यादा सजा करार देते हुए सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग की थी।
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