पीजीआई के वृंदावन कॉलोनी में बुधवार को हुई दुर्गेश यादव की हत्या के बाद नौकरी के नाम पर ठगी के मामले में बेहद सनसनीखेज तथ्य सामने आ रहे हैं। गिरोह से बरामद किए गए 60 से अधिक फर्जी नियुक्ति पत्र सचिवालय के असली नियुक्ति पत्र की कॉपी हासिल कर तैयार किए गए थे। इन पर संबंधित अफसरों के दस्तखत, नाम व पद की मुहर का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया।
इसे जारी कराने में दुर्गेश के गिरोह के गुर्गों ने सचिवालय के समीक्षा अधिकारी अजय यादव व अन्य कर्मचारियों का सहयोग लिया था। पुलिस इस मामले में सचिवालय के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों से पूछताछ करेगी। ये वे अफसर हैं जिनके नाम से नियुक्ति पत्र जारी किए गए हैं।
पुलिस का मानना है कि जल्द ही और भी नाम इस मामले में सामने आ सकते हैं। डीसीपी पूर्वी चारू निगम ने बताया कि पुलिस की गिरफ्त में आया सचिवालय का समीक्षा अधिकारी अजय यादव ही इसका मास्टरमाइंड है। हत्या व ठगी मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ब्यूरो
इतने शातिर...असली जैसा दिखे इसलिए हासिल की सचिवालय के नियुक्ति पत्र की प्रति
प्रभारी निरीक्षक केके मिश्रा के मुताबिक फर्जी नियुक्ति पत्र जारी कराने में दुर्गेश के गिरोह ने अजय यादव व अन्य सचिवालय कर्मचारियों का सहयोग लिया। किसी को शक न हो इसके लिए गिरोह ने सचिवालय से जारी होने वाले नियुक्ति पत्र की प्रति व मुहर हासिल की।
बैंक खातों की डिटेल खंगाल रही पुलिस
उन्होंने बताया किजालसाजों अजय यादव, मानवेंद्र, सोवेंद्र, अभय, संजीत, मृतक दुर्गेश यादव, आरोपी पलक ठाकुर, मनीष यादव के खातों के अलावा कॉल डिटेल मंगाई गई हैं। तीन अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस बिजनौर, एटा, फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद में डेरा डाले हुए है।