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दीपोत्सव देखने पहुंचे विदेशी श्रद्धालु : बोले- राम की अयोध्या को संवार रहे योगी, साढ़े चार वर्षों में 30 बार पहुंचे सीएम

Thu, 04 Nov 2021 12:01 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

अयोध्या पहुंचे लोग एक तरफ जहां राम मंदिर के निर्माण को लेकर गोरखनाथ पीठ की तीन पीढ़ियों के संघर्ष को जान पा रहे हैं तो दूसरी तरफ  वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा संवारी जा रही अयोध्या को देख पा रहे हैं।
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अयोध्या में दीपोत्सव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अयोध्या में भव्य दीपोत्सव देखने के लिए देश-विदेश के श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे हैं। अयोध्या पहुंचे लोग एक तरफ जहां राम मंदिर के निर्माण को लेकर गोरखनाथ पीठ की तीन पीढ़ियों के संघर्ष को जान पा रहे हैं तो दूसरी तरफ  वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा संवारी जा रही अयोध्या को देख पा रहे हैं। सीएम योगी की पहल पर वर्ष 2017 से शुरू हुए इस दीपोत्सव को अब पूरी दुनिया देखती है।

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अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर स्थल को देखने के साथ ही श्रद्धालुओं के लिए यहां स्थापित की जाने वाली राम प्रतिमा भी एक आकर्षण का केंद्र हैं। यह प्रतिमा दुनिया की किसी भी दूसरी प्रतिमा से अधिक ऊंची होगी। इसके लिए सरयू पर देश का सबसे लंबा घाट बन रहा है। नव्य अयोध्या बसाने की योजना पर कार्य हो रहा है। 

अयोध्या और गोरक्षपीठ का रिश्ता पुराना व आत्मीय है। योगी के दादा गुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ ने इसकी शुरुआत की थी। योगी के गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ ने राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष के रूप में वर्षों तक राम मंदिर आंदोलन को रणनीति, दिशा और धार दी। सीएम योगी के एजेंडे में अयोध्या सर्वोपरि है। वह अब तक के कार्यकाल में 30 बार अयोध्या आए हैं। उनके कार्यकाल की हर दिवाली में यहां असाधारण दीपोत्सव आयोजित हुए।
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रामनगरी में योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता जाति और धर्म से परे है। यहां के तमाम लोगों का तो कहना है कि भगवान राम की अयोध्या को सीएम योगी संवार रहे हैं। यह अयोध्या अब योगी की अयोध्या हो गई है। जल्दी ही अयोध्या यूपी की अर्थव्यवस्था का नया केंद्र बनेगी।

अयोध्या के प्रति सीएम योगी का लगाव नया नहीं है। वह जिस गोरक्षपीठ के महंत हैं, उसकी राम मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका रही है। गोरखनाथ मठ की तीन पीढ़ियां राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी रही हैं। गोरखनाथ मठ के महंत दिग्विजयनाथ का इस आंदोलन में बड़ा योगदान रहा तो उनके ब्रह्मलीन होने के बाद उनके शिष्य और उत्तराधिकारी महंत अवेद्यनाथ ने मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

योगी ने सत्ता संभालने के बाद अयोध्या से खुद को जोड़े रखा
वर्ष 1949 में विवादित ढांचे में जब रामलला का कथित तौर पर प्रकटीकरण हुआ। उस दौरान वहां गोरखनाथ मंदिर के तत्कालीन महंत दिग्विजयनाथ कुछ साधु-संतों के साथ कीर्तन कर रहे थे। उन्होंने राम मंदिर की शिला पूजन में भी भाग लिया था। वर्ष 1986 में जब कोर्ट के आदेश पर विवादित परिसर का ताला खोला गया, उस वक्त महंत अवेद्यनाथ वहां मौजूद थे। अयोध्या में जब परिक्रमा पर रोक लगी थी, तो वहां जाने को लेकर योगी आदित्यनाथ की गिरफ्तारी हुई थी। प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद सीएम योगी ने अयोध्या से खुद को भावनात्मक और धार्मिक तरीके से हमेशा जोड़े रखा है। 

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