फूड लाइसेंस के पंजीकरण की व्यवस्था बुधवार से राजधानी समेत चार जिलों में लागू होगी।
इसके बाद चिह्नित जिलों में खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन के स्तर पर मैनुअल आवेदन की वर्तमान व्यवस्था पर विराम लग जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत सालाना 12 लाख से कम का टर्न ओवर वाले व्यापारियों के लिए महज पंजीकरण अनिवार्य होगा। जबकि इससे अधिक टर्न ओवर पर लाइसेंस जारी होगा।
एफएसडीए के मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी जेपी सिंह ने बताया कि ऑन लाइन व्यवस्था लखनऊ सहित हापुड़,गाजियाबाद व गौतमबुद्ध नगर (नोयडा) में लागू होगी।
इसके बाद प्रदेश के बाकी जिलों में लागू की जाएगी। एफएसएसआई द्वारा शुरू की जा रही व्यवस्था के तहत व्यापारी को विभागीय वेवसाइट एफएसएसएआई.जीओवी.इन पर जाकर एफएलआरएस क्लिक करना होगा।
इसमें आईडी व पासवर्ड डालने पर पंजीयन अथवा लाइसेंस के लिए आवेदन फॉर्म उपलब्ध होगा। इसमें दर्ज सूचनाओं को सौ रुपये चालान शुल्क की रसीद संख्या के साथ दर्ज करते हुए भरना होगा।
इसके बाद आवेदन से जुड़े जरूरी अभिलेखों की सत्यापित कॉपी संबंधित जिला कार्यालय में पहुंचानी होगी।
निर्धारित शुल्क
सालाना 12 लाख से कम टर्न ओवर वाले व्यापारियों को महज सौ रुपये शुल्क के साथ पंजीकरण ही कराना होगा। इससे अधिक टर्न ओवर वाले व्यवसायियों को पंजीयन के बाद अतिरिक्त शुल्क के आधार पर लाइसेंस जारी होगा।
लाइसेंस शुल्क थोक व वितरक के लिए दो हजार,निर्माण कार्य से जुड़े व्यवसायियों के लिए तीन हजार और सालाना एक मैट्रिक टन से ज्यादा उत्पादन करने वाली इकाईयों पर पांच हजार रुपये वार्षिक होगा।
सभी के लिए अनिवार्य
खाद्य सामग्री के निर्माण,विक्रय,थोक अथवा खुदरा स्तर पर सामग्री अथवा इससे बने उत्पाद की बिक्री करने वाले हर छोटे-बड़े व्यवसायी के लिए 4 फरवरी तक रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है।
इसके दायरे में फेरीवाले,फुटपाथ पर खानपान की दुकान लगाने वाले,मंदिरों में प्रसाद बेचने वाले,राशन अनाज का वितरण करने वाले,खाद्य तेल व रिफाइंड बनाने वाले,स्कूल कॉलेजों में कैंटीन अथवा मेस संचालित करने वाले।
इसके अलावा टिफिन सप्लाई करने वाले,कैटरिंग व्यवसायी,फल जूस के धंधे से जुड़े दुकानदारों सहित कच्चे अथवा पक्के स्तर पर खाद्य सामग्री के धंधे से जुड़े व्यवसायी आएंगे। तय समय सीमा में पंजीकरण न कराने वालों के खिलाफ एफएसडीए प्रशासन दंडात्मक कार्रवाई करेगा।