तपोस्थली स्थित सभामंडप पर प्रार्थना करते अनुयायी।
कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती सोमवार को अनुयायियों से गुलजार रही। कोरिया से आए 110 सदस्यीय दल ने सभामंडप में भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में प्रार्थना की।
इस दौरान भिक्षु देवानंद ने कहा कि श्रावस्ती में पूजा करने से मनुष्य के दुखों का निवारण होता है। भिक्षुओं की संख्या बहुत बढ़ने पर बौद्ध संघ की स्थापना की गई। बाद में लोगों के आग्रह पर बुद्ध ने स्त्रियों को भी संघ में लेने के लिए अनुमति दे दी। हालांकि इसे उन्होंने उतना अच्छा नहीं माना। भगवान बुद्ध ने लोक कल्याण के लिए बौद्ध धर्म का प्रचार करने के लिए बौद्ध भिक्षुओं को इधर-उधर भेजा। मौर्य काल तक आते-आते भारत से निकलकर बौद्ध धर्म चीन, जापान, कोरिया, मंगोलिया, म्यांमार, थाईलैंड, श्रीलंका आदि देशों में भी फैल चुका था। इन देशों में बौद्ध धर्म बहुसंख्यक है। पूजन के बाद सभी उपासकों ने कच्ची कुटी, पक्की कुटी, अंगुलिमाल स्तूप, ओड़ाझार आदि का भ्रमण किया। इस मौके पर काफी संख्या में उपासक व उपासिकाएं मौजूद रहीं।