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यूपी: बाढ़ ने मचाई तबाही, 700 गांवों पर मंडरा रहा खतरा

Tue, 09 Aug 2016 08:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनैलगंज (गोंडा)
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गोंडा के करनैलगंज में 23 घंटे के भीतर एल्गिन-चरसड़ी और रिंग बांध घाघरा की लहरों में समा गए। बांध कटने से 700 गांव खतरे की जद में हैं। बांध कटते ही इलाके में हड़कंप मच गया। बांध बचाव के कार्य में लगे अफसर भी भाग खड़े हुए। क्षेत्र में एनाउंसमेंट कराकर लोगों को घर खाली कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए कहा जा रहा है।
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प्रशासन ने बाढ़ से बचाव के लिए एनडीआरएफ टीम के साथ सेना को बुला लिया है। तहसील क्षेत्र के ग्राम नकहरा, प्रतापपुर, काशीपुर, चचरी, पाल्हापुर, घरकुंइया, गौरा मांझा, रेक्सड़िया, रायपुर, पूरे अंगद, भटपुरवा, नैनुवा जगन्नाथपुर, बसेरिया, नकार के करीब 100 मजरे मंगलवार तक बाढ़ से प्रभावित होने की प्रबल आशंका है।

प्रमुख सिंचाई सुरेश चंद्रा, आयुक्त देवीपाटन मंडल सुधीर कुमार दीक्षित व डीएम आशुतोष निरंजन, क्षेत्रीय विधायक, एसडीएम व सिंचाई विभाग के करीब एक दर्जन अभियंता मौके पर मौजूद हैं।
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एक मीटर हिस्सा बचा था जो कि कट गया

रविवार रात करीब साढ़े 10 बजे एल्गिन-चरसड़ी बांध के बचे हुए एक मीटर हिस्से को भी नदी ने काट दिया था। इसके बाद सोमवार दोपहर रिंग बांध में भी रिसाव शुरू हो गया और रात करीब 9:10 बजे रिंग बांध भी घाघरा में समा गया।

इससे 50 गांवों के सैकड़ों मजरों में बाढ़ का पानी भरना शुरू हो गया है। हालांकि गनीमत सिर्फ इतनी है कि नदी का जलस्तर कम है, इसलिए पानी का फैलाव सिर्फ जमीन तक की है।

लेकिन माना जा रहा है कि नदी के जलस्तर में जैसे ही बढ़ोतरी होती है, वैसे ही इसका पानी आसपास के गांवों को अपनी चपेट में ले लेगा। इसके मद्देनजर प्रशासन ने सेना व एनडीआरएफ की टीम को बुला लिया है।

72 ग्राम पंचायतें बाढ़ की जद में

लोग तेजी से पलायन कर रहे हैं - फोटो : amar ujala
वहीं, गांवों में डुग्गी-मुनादी कर लोगों से गांव खाली करने को भी कहा जा रहा है। मुख्य बांध कटने से करनैलगंल तहसील क्षेत्र के करनैलगंज ब्लॉक व परसपुर ब्लॉक की करीब 72 ग्राम पंचायतों के 700 गांव बाढ़ की जद में आ गए हैं।

मौके पर मौजूद डीएम आशुतोष निरंजन ने बताया कि आपदा से निपटने के लिए सेना को बुलाया गया है।

एनडीआरएफ सहित फ्लड पीएसी को लगा दिया गया है। उधर, बाढ़ की आशंका से डरे ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है।

गांवों में तेजी से बढ़ेगा जलस्‍तर

वहीं, एल्गिन-चरसड़ी और रिंग बांध के घाघरा की लहरों में समा जाने से बाराबंकी में भी तबाही का आलम है। एहतियात के तौर पर रायपुर और परसावल गांव को खाली करा लिया है। पानी अभी गांव के किनारे तक है लेकिन जैसे ही पानी बढ़ेगा तो रिंग बांध टूटने के कारण इन गांवों में तेजी से पानी भर जाएगा।

लेकिन सोमवार की दोपहर से पानी के बहाव की रफ्तार एकदम से धीमी हो गई। फिर भी प्रभावित होने वाले गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का दावा किया जा रहा है।

टिकैतनगर प्रतिनिधि के अनुसार रविवार की गोंडा जिले के नकहरा गांव के निकट किलोमीटर संख्या 10.520 के पास बने एल्गिन-चरसड़ी बांध का जो एक मीटर भाग बचा था देर रात वह भी नदी में समा गया। देखते ही देखते घाघरा नदी के पानी ने रिंग बांध को भी अपनी चपेट में ले लिया है।

'कटान करते हुए लगातार बढ़ रहा है नदी का दायरा'

नदी का पानी तटबंध के करीब 150 मीटर तक कटान कर चुका है और 20 मीटर चौड़ा पूरा बांध नदी में समा गया। सोमवार को रिंग बांध के भीतर पानी को रोकने का प्रयास भी विफल रहा। और रिंग बांध भी बह गया। उधर नदी कटान करते हुए लगातार अपना दायरा बढ़ा रही है।

बांध के बाहरी हिस्से से अगल-बगल के खेतों में पानी भरने लगा है। लेकिन जिस तेजी के साथ पानी बढ़ रहा था दोपहर बाद उसकी रफ्तार में कमी आई है। अब यदि नदी का पानी बढ़ता है तभी यह गांवों तक पहुंच सकेगा।

मौजूदा समय में घाघरा में पानी सतह से जमीन की सतह के बराबर बह रहा है इसलिए पानी का फैलाव नहीं हो पा रहा है। लोगों का कहना कि यदि नदी का जलस्तर बढ़ा तो अचानक करनैलगंज क्षेत्र बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हो जाएगा।

रविवार को घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान से जहां 16 सेमी  ऊपर बह रहा था वहीं देर रात पानी बढ़ने से यह खतरे के निशान को पार कर 29 सेमी ऊपर बहने लगा है।

दहशत में तेजी से अपना घर खाली कर रहे हैं ग्रामीण

बांध के कटने की दहशत से ही तबाही दिखाई देने लगी है। ग्रामीणों का पलायन तेज हो गया है। दहशतजदा ग्रामीणों में जल्दी अपना आशियाना खाली करने की जैसे होड़ लगी हो।

गांवों को खाली कराने में प्रशासन ग्रामीणों की कोई भी मदद नहीं कर रहा है। संसाधनों के अभाव में कोई बैलगाड़ी से तो कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली से सामान की ढुलाई कर रहा है।

तमाम ऐसे लोग भी हैं। जिनके पास कोई संसाधन नहीं है तो धीरे-धीरे साइकिल या ठेले से सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे हैं। ग्रामीण अपने आशियाने एंव खेती बारी को भगवान भरोसे छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।

एक अरब रुपये से बना तीसरी बार कटा बांध

सूत्रों की माने तो बांध के निर्माण का कार्य वर्ष 2006 में शुरू हुआ था और 2008 में यह बनकर तैयार हो गया था। 54 किमी लंबे इस बांध के निर्माण पर करीब एक अरब रुपया खर्च होने की बात कही जा रही है।

लेकिन जिस स्थान पर बांध कटा है उसी के आस-पास वर्ष 2009 और 2011 में इससे पहले भी कट चुका है। इस प्रकार तीसरी बार यह बांध इसी क्षेत्र के आस-पास कटा है।

विधायक ने लिया जायजा
करनैलगंज के विधायक योगेश प्रताप सिंह सुबह 6 बजे स्वंय बांध पर पहुंच गए। तथा कट चुके बांध के बाद रिंग बांध को अपने सामने मजबूत कराने का कार्य तेज कराया मगर नदी ने जब उसे आगे से कटान करना शुरू किया तो दोनों बांधों पर बचाव कार्य शुरू कराया फिर भी नदी की तेज धारा के आगे एक न चली। विधायक ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सिंचाई मंत्री व मुख्यमंत्री को पूरे मामले से अवगत कराया।
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ये कहना है अफसर का

मामले पर अपर जिलाधिकारी हरिकेश चौरसिया का कहना है कि एल्गिन चरसड़ी तटबंध की स्थिति रविवार को देख कर ही यह पता चल गया था कि बांध को बचा पाना मुश्किल है। फिर भी मरम्मत का कार्य किया जा रहा था लेकिन रात में पानी बढ़ने की वजह से बांध उसी में बह गया। इससे जिले के पांच गांव प्रभावित होंगे लेकिन नदी में पानी कम होने की वजह से अभी यह गांवों तक नहीं पहुंचा है। एहतियात के तौर पर गांवों को पूरी तरह से खाली कर दिया गया है और पूरी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
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