मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में प्रदेश कैबिनेट ने सोमवार को प्रदेश के 16 लाख कर्मचारियों के मौजूदा मकान किराए भत्ते में 20 फीसदी वृद्धि को मंजूरी दे दी। बढ़े एचआरए का लाभ एक अगस्त से मिलेगा और इसका भुगतान अगस्त के वेतन में जोड़कर सितंबर में दिया जाएगा।
वित्त विभाग के सचिव अजय अग्रवाल ने बताया कि मकान किराया भत्ते में 20 फीसदी वृद्धि से प्रदेश सकार करीब 500 करोड़ रुपये वार्षिक अतिरिक्त व्ययभार आएगा।
इस निर्णय से प्रदेश के 8.50 लाख राज्य कर्मचारी, 5.50 लाख शिक्षक, एक लाख शिक्षणेतर कर्मचारियों के अलावा स्थानीय निकायों, जिला पंचायतों, विकास प्राधिकरणों, स्वशासी संस्थाओं, सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों के कर्मचारी फायदा पाएंगे।
'900 रुपये से 10500 रुपये तक मिलता है'
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प्रदेश सरकार ने एचआरए के लिए सूबे के शहरों का वर्गीकरण कर रखा है। इसके अंतर्गत श्रेणी ए, बी-1 व बी-2 के लिए ग्रेड पे-1300 से नियत वेतनमान 80 हजार तक के लिए एचएआर तय है।
इसमें एचआरए की शुरुआत 900 रुपये से होकर 10500 रुपये तक जाती है। इस श्रेणी के शुरुआती ग्रेड पे के एचआरए में 180 रुपये की जबकि 80 हजार नियत वेतनमान में 2100 रुपये की वृद्धि हुई है।
श्रेणी सी के शहरों में कार्यरत कर्मियों का एचआरए ग्रेड पे वार पहली श्रेणी का आधा हो जाता है। इस तरह श्रेणी सी में 1300 ग्रेड पे पाने वाले कर्मी के एचआरए में 90 रुपये और नियत वेतनमान वाले अधिकारियों के ग्रेड पे में 1050 रुपये बढ़े हैं। इस श्रेणी से बचे सभी ग्रामीण व शहरी क्षेत्र अवर्गीकृत श्रेणी में आते हैं।
ऐसे क्षेत्रों में ग्रेड पे-1300 वाले कर्मी वर्तमान में 300 रुपये एचआरए पा रहे हैं। उन्हें अब 360 रुपये मिलेगा। इस तरह इनके एचआरए में 60 रुपये की बढ़ोतरी होगी। इसी तरह अवर्गीकृत क्षेत्रों में कार्यरत होने वाले नियत वेतनमान वाले अधिकारी वर्तमान एचआरए 3500 रुपये के स्थान पर 4200 रुपये पाएंगे।
विभागीय कार्रवाई जारी तो भी नकदीकरण का पैसा
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प्रदेश कैबिनेट ने पुराने नियम में बदलाव करते हुए विभागीय कार्रवाई केदौरान रिटायर होने वाले कर्मियों के अवकाश नकदीकरण की राशि का भुगतान कराने को मंजूरी दे दी है। हालांकि इसके लिए एक प्रक्रिया तय की गई है और सक्षम अधिकारी रकम के किसी अंश को रोकना जरूरी समझेगा तो उसे रोककर भुगतान किया जाएगा।
वर्तमान में यदि कोई सरकारी कर्मी निलंबित रहते हुए सेवानिवृत्त हो जाता है अथवा उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई चल रही होती है तो उसके अवकाश नकदीकरण की रकम भी रोक ली जाती है।
कार्रवाई की समाप्ति पर सक्षम अधिकारी जब यह लिखकर दे देता है कि उसका निलंबन पूरी तरह अनुचित था, तब उसके अकाउंट में जमा राशि का भुगतान कर दिया जाता है। प्रदेश में यह व्यवस्था केंद्र के नियमों के अनुरूप लागू थी। केंद्र सरकार ने बाद में इसमें बदलाव कर दिया।
दंड के रूप में जमा राशि पर होगी कटौती
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केंद्र ने तय किया है कि यदि कोई सरकारी कर्मी निलंबित रहते हुए, या अनुशासनिक व दंड की कार्रवाई चलते हुए रिटायर हाता है तो सक्षम अधिकारी यह देखेगा कि उस सरकारी सेवक से दंड के रूप में कोई राशि वसूल करने की संभावना है या नहीं।
यदि वसूल होने की संभावना है तो उसके खाते में जमा अर्जित अवकाश के बराबर नकद राशि को पूरा अथवा आंशिक रूप से रोकते हुए बाकी रकम का भुगतान कर दिया जाएगा।
प्रदेश कैबिनेट ने केंद्र सरकार की इस बदली हुई व्यवस्था को प्रदेश में भी लागू करने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए सेवानिवृत्ति के दिनांक को सरकारी सेवकों के अवकाश अकाउंट में जमा अर्जित अवकाश के बदले नकद राशि के भुगतान संबंधी 25 जुलाई 1983 के शासनादेश में संशोधन किया गया है।
सरकार के इस फैसले से कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्हें अवकाश नकदीकरण की रकम के लिए अनावश्यक परेशान नहीं होना पड़ेगा।
ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर अब करनी होगी ज्यादा जेब ढीली
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अब यदि आपने ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया तो आपको अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी। सोमवार को कैबिनेट ने यातायात नियमों के उल्लंघन में वसूले जाने वाले जुर्माने की रकम बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
इसके साथ ही, ट्रैफिक पुलिस के हेड कांस्टेबल व पुलिस के दरोगा को अपने थाना क्षेत्र में जुर्माना वसूलने के अधिकार दिए गए हैं। बता दें, अभी तक 29 जून 2006 की अधिसूचना के तहत दंडनीय यातायात अपराधों के लिए नागरिक पुलिस एवं यातायात पुलिस के राजपत्रित अधिकारियों के साथ ही ट्रैफिक पुलिस के इंस्पेक्टर व सब इंस्पेक्टर को जुर्माना वसूलने का अधिकार था। इसके तहत थानेदार भी जुर्माना वसूल सकते थे।
सरकार ने कई नए अपराधों के लिए दंड निर्धारित किए हैं। यदि आप सरकार की लिखित अनुमति के बगैर वाहनों की रेस लगाते हैं तो इसके लिए आप पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। बिना बीमा के वाहन चलाने एवं ओवरस्पीडिंग के मामले में भी पकड़े जाने पर अधिक जुर्माना देना होगा।
आगरा एक्सप्रेस-वे पर मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं
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कैबिनेट ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के लिए एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) के प्रावधान संबंधी कार्य के लिए परियोजना विकास परामर्शी की अतिरिक्त सेवाएं लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
एटीएमएस कार्य के लिए पूर्व चयनित परियोजना विकास परामर्शी मेसर्स फीडबैक इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स रेडिकान (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के कन्सोर्टियम की अतिरिक्त सेवाएं ली जाएंगी। परामर्शी को देय अतिरिक्त 15 लाख रुपये का भुगतान वित्तीय वर्ष 2016-17 के बजट से किया जाएगा।
इस तरह की जा रही हैं व्यवस्थाएं
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यहां बता दें कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर यातायात को सुविधाजनक और दुर्घटनारहित बनाने के लिए उस पर नियंत्रण, निर्देशन और पर्यवेक्षण आदि स्थापित करने के लिए एक्सप्रेस-वे में एटीएमएस की व्यवस्था की जा रही है।
एटीएमएस में मुख्यत: इमरजेंसी कॉल बॉक्सेज (ईसीबी), निर्देशों के डिस्प्ले के लिए एलईडी स्क्रीन, सीसीटीवी, एमईटी सिस्टम, मौसम की जानकारी के लिए मेट्रोलॉजिकल डाटा स्टेशन, तापमान सेंसर, हवा की गति व दिशा सेंसर, सड़क का तापमान सेंसर, आर्द्रता सेंसर, विजिबिलिटी सेंसर, डाटा लॉगर, मोबाइल रेडियो कम्यूनिकेशन सिस्टम, दुर्घटना पीड़ितों को शीघ्र मदद पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस, ट्रॉमा सेंटर्स, डेडिकेटेड ऑप्टिकल फाइबर केबल सिस्टम और एक्सप्रेस-वे की सभी गतिविधियों की मॉनिटरिंग और को-ऑर्डिनेशन के लिए कंट्रोल सेंटर की स्थापना आदि काम होंगे।
वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने को नई नियमावली
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कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश आवश्यक वस्तु (विक्रय एवं वितरण नियंत्रण का विनियमन) आदेश-2016 को मंजूरी दे दी है। इससे पहले कंट्रोल ऑर्डर प्रचलित था।
नई नियमावली से खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने, अंत्योदय एवं पात्र गृहस्थी के लाभार्थियों को रियायती दर पर समय से अनाज उपलब्ध कराने और संभावित अनियमितताओं को रोकने में मदद मिलेगी।
भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के क्रम में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली प्रदेश में एक जून 1997 से लागू हुई थी। इसके तहत एपीएल बीपीएल और अंत्योदय श्रेणी के लाभार्थी थे। इस प्रणाली को विनियमित करने के लिए राज्य सरकार ने उप्र अनुसूचित वस्तु वितरण आदेश 2004 लागू किया था।
भारत सरकार ने 5 जुलाई 2013 से पूर्व की लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के स्थान पर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 लागू कर दिया। प्रदेश में इसे एक मार्च 2016 से लागू किया गया है। इस अधिनियम के तहत भारत सरकार ने प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र की 79.56 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र की 64.43 प्रतिशत आबादी को कवर किया है।
40,451 करोड़ रुपये के बांड जारी करेगी सरकार
भारी घाटे में चल रही प्रदेश की बिजली कंपनियों की माली हालत सुधारने के लिए केंद्र सरकार द्वारा घोषित उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) के तहत सरकार 40,451.30 करोड़ रुपये के बांड जारी करेगी।
सोमवार को कैबिनेट में लिए गए फैसले के अनुसार प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों पर 30 सितंबर 2015 को बकाया ऋ ण 53,935.0618 करोड़ रुपये के 75 प्रतिशत अंश यानी 40,451.30 करोड़ रुपये के ऋण को राज्य सरकार बांड के जरिये अधिग्रहीत करेगी।
यह धनराशि अगले दो वर्षों में 50 प्रतिशत अनुदान, 25 प्रतिशत अंशपूंजी और 25 प्रतिशत ब्याज रहित ऋण के रूप में पावर कॉर्पोरेशन को उपलब्ध कराई जाएगी।
अनुदान में परिवर्तित हो जाएगी राशि
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फैसले के अनुसार ब्याज रहित ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाने वाली धनराशि को वर्ष 2017-18 में अनुदान में परिवर्तित कर दिया जाएगा।
बिजली कंपनियों के बकाया ऋण 13,483.77 करोड़ रुपये तथा भविष्य में उदय योजनांतर्गत अनुमन्य सीमा तक की लाइन हानियों की प्रतिपूर्ति के लिए एवं 31 मार्च 2015 को केंद्रीय बिजली संस्थाओं एवं निजी बिजली उत्पादकों के लंबित 6222 करोड़ रुपये के लिए वितरण कंपनियों द्वारा जारी किए जाने वाले बांड अथवा ऋण की ब्याज एवं अन्य समस्त देयों सहित अदायगी के लिए शासकीय गारंटी दी जाएगी।
उदय योजना के अनुरूप कार्यशील पूंजी के लिए ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) से मार्च 2016 में लिए गए 1500 करोड़ रुपये के ऋण की वर्ष 2015-16 के लिए 1500 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2016-17 से 2018-19 तक प्रति वर्ष 3000 करोड़ रुपये के ऋणों की ब्याज एवं अन्य समस्त देयों सहित अदायगी के लिए शासकीय गारंटी दी जाएगी। सभी शासकीय गारंटी पर गारंटी शुल्क माफ करने का भी निर्णय किया गया है।